78 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
में केवल एक मजबूत सरकार पर क्रियाशील रहने के लिए भरोसा किया जा सकता है। उस सरकारी व्यवस्था की कार्य - कुशलता बहुत कमजोर होती है, जहां एक देश में कई सरकारें कार्य करती हैं, जिनसे शक्ति के अलग - अलग केन्द्र बन जाते हैं, जिनमें अलग - अलग राजनीतिक संस्थाओं का समावेश होता है, और राष्ट्र की शक्ति अलग - अलग हिस्सों में प्रवाहित होती है, जिसका व्यक्तियों की तुलना में केन्द्रीय सरकार की इच्छा के मुकाबले प्रतिरोध अधिक प्रभावी होता है, क्योंकि ऐसी संस्थाओं में प्रत्येक को स्वयं एक सरकार मिली होती है, जिन्हें राजस्व, सैन्य और स्थानीय देशभक्ति की भावना जोड़े रहती है। पहले मामले में सरकार का स्वरूप एकात्मक होता है, दूसरे मामले में सरकार का स्वरूप संघीय होता है।
भारतीय संघ इस तथ्य के कारण कि यह संघ है, सरकार के संघीय स्वरूप की सभी कमजोरियां रखता है। लेकिन भारतीय संघ में कुछ और अधिक कमजोरियां हैं, जो अन्य संघों में नहीं मिलतीं, जिनकी वजह से वे इसे पूरी तरह कमजोर करती हैं। भारतीय संघ की संयुक्त राज्य अमरीका के संघ से तुलना की जाए। ब्राइस के कथानुसार :
राष्ट्रीय सरकार का हर राज्य के नागरिकों पर सीधा और आसन्न प्राधिकार है, जिसका
प्रयोग राज्य संगठनों के जरिए नहीं होता, न उसके लिए राज्य सरकार की मदद की
आवश्यकता होती है। अधिकतर मामलों में राष्ट्रीय सरकार राज्यों की उपेक्षा करती
है और नागरिकों को अपने कानून से समान रूप से बंधा हुआ मानती है। संघीय
न्यायालय, राजस्व अधिकारी और डाकखाने राज्य के किसी भी अधिकारी की सहायता
नहीं लेते, वरन् सीधे वाशिंगटन पर निर्भर करते हैं। संघीय मामलों में कोई स्थानीय
स्वशासन नहीं होता। संघीय प्राधिकार, चाहे कार्यकारी हो अथवा न्यायिक, एक राज्य
के नागरिक पर अपने निजी अधिकारियों के जरिए सीधे कार्रवाई करता है, जो कि
राज्य कर्मचारियों से बिल्कुल भिन्न और स्वतंत्र होते हैं। उदाहरणार्थ, वाशिंगटन स्थित
वित्त विभाग के आदेशानुसार संघीय सीमा शुल्क समाहर्ता और आबकारी अधिकारियों
द्वारा संघीय परोक्ष कर तटीय क्षेत्रों और पूरे देश में लागू कर जाते हैं। अमरीका के
मार्शल संघीय न्यायालय के निर्णयों का पालन कराते हैं, जो कि उसी प्रकार पूरे देश
में फैले हुए हैं और सहायकों का अमला रखते हैं। यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रावधान
है, क्योंकि इससे केन्द्रीय, राष्ट्रीय सरकार के लिए हर जगह लोगों पर उंगली रखना
संभव होता है। वह अपने कानून बना सकती है और अपने विधिवत संगठित अभिकरणों
के आदेशों का आदर करा सकती है, चाहे राज्य जिसकी कि सीमा में वह कार्य करती
है, हृदय से स्वामिभक्त है या नहीं, और चाहे वह कानून जिसे वहां लागू किया जा
रहा है, लोकप्रिय है अथवा हानिकारक। पूरे देश में राष्ट्रीय सरकार का संगठन इस
तरह बिखरा होता है, जैसे धमनियां पूरे शरीर में फैली होती हैं, केन्द्रीय कार्यपालिका
से हर बिंदु को सीधे जोड़े हुए।
इसमें से एक भी चीज भारतीय संघ के विषय में निश्चयपूर्वक नहीं कही जा सकती। यह एक आश्रित सरकार है और इसका लोगों से सीधा संबंध नहीं है।