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संघ बनाम स्वतंत्रता

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प्रति विश्वासपात्र रहूंगा और मैं अपने कर्तव्य का पालन विश्वासपूर्वक करूंगा, जिसके

लिए यहां प्रवेश ले रहा हूं। देशी राज्य का नागरिक, जैसा कि शपथ के प्रारूप से

स्पष्ट है, दोहरी निष्ठा प्रकट करता है। उसे राज्य के शासक और सम्राट, दोनों

के प्रति निष्ठा की शपथ लेनी पड़ती है। सामान्यतः ऐसी स्थिति अमरीका से बहुत

अधिक भिन्न नहीं है। अमरीका में एक व्यक्ति संघ का भी नागरिक होता है तथा

राज्य का भी, और दोनों शक्तियों के प्रति निष्ठावान होता है। हर शक्ति को अपनी

आज्ञा - पालन कराने का अधिकार है। लेकिन किसी विवाद की स्थिति में किसकी

आज्ञा का पालन किया जाए, इस संबंध में आप दोनों के बीच अंतर पाएंगे। इस प्रश्न

पर ब्राइस का मत है :

राज्य का आज्ञा - पालन कराने का अधिकार, जिन विषयों में उसका दखल है, बहुत

विस्तृत है। प्रथम दृष्टि में राज्य का हर कानून, राज्य के समक्ष प्राधिकारी का हर

आदेश नागरिक को नियंत्रित करता है, जब कि राष्ट्रीय सरकार को सीमित शक्ति

प्राप्त होती है; यह विधि - निर्माण कर सकती है अथवा कुछ खास उद्देश्यों के लिए

या खास नागरिकों पर नियंत्रण रख सकती है। लेकिन अपनी शक्तियों की सीमा में

राज्य से इसका प्राधिकार बड़ा होता है, जिसे राज्य की अवहेलना का जोखिम उठाते

हुए भी माना जाना चाहिए।

एक राज्य विधामंडल अथवा राज्य की कार्यपालिका की कोई कार्यवाही संविधान से

अथवा राष्ट्रीय सरकार के किसी कार्य से टकराती है जिसे कि संविधान के अंतर्गत

किया गया है, जो वास्तव में राज्य सरकार की कार्यवाही नहीं है क्योंकि राज्य सरकार

कानूनी तौर पर संविधान के विरुद्ध कार्य नहीं कर सकती, लेकिन गलत तौर पर

उन कुछ व्यक्तियों की कार्यवाही है जो कि सरकार की तरह कार्य करते हैं, इसीलिए

तथ्यतः ऐसी कार्यवाही न्यायिक रूप से अमान्य है। जो व्यक्ति राज्य के प्राधिकारी के

आदेशों का सहारा लेकर संघ के प्राधिकार की अवज्ञा करते हैं, वे केन्द्र सरकार के

विरुद्ध विद्रोही हैं, उन्हें केन्द्र सरकार द्वारा कुचल देना चाहिए। ऐसे विद्रोहियों का

प्रपीड़न राज्य - विरुद्ध कार्यवाही नहीं, वरन ऐसे व्यक्तियों के प्रति है जो संगठित रूप

से गलत कार्य करते हैं। एक राज्य न पृथक हो सकता है, न विद्रोह कर सकता है।

इसी प्रकार इसका प्रपीड़न भी नहीं किया जा सकता।

क्या निष्ठा संबंधी विवाद होने पर भारत में संघीय सरकार ऐसे कदम उठा सकती है, जो कि एक संघीय सरकार कर सकती है? निस्संदेह ऐसा नहीं किया जा सकता। इसका मामूली सा कारण है कि सम्राट के प्रति निष्ठा, शासक के प्रति निष्ठा का बचाव करती है। यदि यह एक खतरनाक स्थिति नहीं तो बहुत दुखद अवश्य है।

संघीय ढांचे की शक्ति

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देश में जो सरकार संपूर्ण राष्ट्र की एकीकृत इच्छा के अनुरूप व्यक्त कर सकती हो और काम कर सकती हो, वास्तव में सबसे दृढ़ सरकार है, जो कि होनी चाहिए और आपातकाल