80 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
भारत कोई मामूली क्षेत्र नहीं है। ब्रिटिश भारत और भारतीय भारत के विषय में आगे दिए गए क्षेत्रफल और जनसंख्या के आंकड़े एक तुलनात्मक स्थिति बताएंगे :
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1931 1931
ब्रिटिश भारत 8,62,630 2,56,859,787 (बर्मा और अदन को छोड़कर)
देशी राज्य 7,12,508 81,310,845
इससे मालूम होता है कि भारतीय भारत में 39 प्रतिशत जनसंख्या है और समस्त भारत का 31 प्रतिशत क्षेत्रफल है।
कितना भारतीय भारत इस संघ में शामिल किया जा रहा है?
बहुतेरे यह कहना चाहेंगे कि चूंकि यह अखिल भारतीय संघ के रूप में बोला जाता है, इस क्षेत्र का प्रत्येक इंच संघ में शामिल किया जाएगा और यह संघीय सरकार के प्राधिकार के अंतर्गत रहेगा। निःसंदेह इस तरह की धारणा धारा 6(1) की शब्दावली से ध्वनित होती है जो राज्यों के विलय से संबंधित है। यह धारा एक शासक के संघ में सम्मिलित होने की इच्छा के बारे में बताती है और तनुदरूप यह सुझाती है कि प्रत्येक देशी राज्य को संघ में शामिल हो जाना चाहिए। अगर यह सही है तो निस्संदेह कालांतर में संघ एक अखिल भारतीय संघ बन सकेगा। लेकिन यह धारणा गलत है। यदि धारा 6(1) को अधिनियम की अनुसूची 1 के साथ पढ़ें तो यह धारणा निर्मूल सिद्ध होगी। अनुसूची 1 मात्र एक ऐसी अनुसूची मानी जाती है, जिसमें शासकों की सीटों की तालिका दी गई है। अनुसूची का यह एक अपूर्ण अध्ययन है। यह अनुसूची इससे भी कुछ और अधिक है। यह सीटों की मात्र तालिका ही प्रस्तुत नहीं करती, वरन राज्यों के संघ में सम्मिलित होने की पात्रता भी गिनाती है और तदनुरूप उनके लिए अधिकाधिक सीटें निश्चित करती है, जो यदि चाहें तो संघ में सम्मिलित हो सकते हैं। अनुसूची 1 में प्रदर्शित सीटों की तालिका की यह विशेषता है।
संघ में शामिल हो सकने वाले देशी राज्यों की कुल संख्या क्या है? अनुसूची 1 में ऐसी संख्या 147 तक है। अनुसूची में जो सीमा तय की गई है, उसके बारे में कई सवाल उठते हैं सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत में कुल 627 राज्य हैं। इसका तात्पर्य है, 480 राज्य संघ के बाहर रहेंगे और संघ का कभी भी हिस्सा नहीं बन सकते। क्या इसे एक अखिल भारतीय संघ कह सकते हैं? अगर इसे एक अखिल भारतीय संघ बनना है तो इन राज्यों को अलग क्यों रखा गया है? इन बहिष्कृत राज्यों की क्या स्थिति है? अगर वे प्रभुसत्ता वाले राज्य नहीं हैं तो उन्हें संघ में क्यों शामिल किया जा रहा है? यदि वे प्रभुसत्ता - विहीन राज्य हैं और उनकी प्रभुसत्ता ब्रिटिश सम्राट के साथ है तो ब्रिटिश सम्राट ने इन क्षेत्रों के विषय में संघ को प्रभुसत्ता क्यों हस्तांतरित नहीं की है? ऐसे बहिष्कृत राज्य की अंतिम नियति क्या होगी? क्या उनका अन्य देशी राज्यों में विलय हो जाएगा अथवा