विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 89
(ग) श्री सेनगुप्ता को प्रारंभ में गलती से 200-10-250 रुपये के पुराने वेतनमान में नियुक्त कर दिया गया था। गलती का पता लगने पर उन्हें 100/- रुपये पर प्रारंभ होने वाले समुचित नए वेतनमान पर ले आया गया।
मुसलमान को 100/- पर आरंभ होने वाले समुचित नए वेतनमान में नियुक्त किया गया था। उसके बाद दोनों को प्रोन्नत कर दिया गया है।
(घ) प्रश्न नहीं उठता।
मौलवी सैयद मुर्तज़ा साहिब बहादुरः क्या मैं जान सकता हूँ कि क्या उन दोनों को उसी समान वेतनमान में प्रोन्नत किया गया है?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मेरा ऐसा ख्याल है।
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* भारत सरकार मुद्रणालय, नई दिल्ली की मशीनों की मरम्मत
427. मौलवी सैयद मुर्तज़ा साहिब बहादुरः (क) क्या माननीय श्रम सदस्य उस राशि को बताने की कृपा करेंगे जो भारत सरकार मुद्रणालय, नई दिल्ली की मशीनों की मरम्मत पर खर्च हुई_
(ख) क्या यह सच है कि उक्त मुद्रणालय में एक यांत्रिक (मैकेनिकल) अनुभाग है और यदि हाँ तो मरम्मत वहां नहीं की जाती_
(ग) क्या यह सच है कि प्रधान यांत्रिक (हैड मैकेनिक) व्यक्गित रूप से पुर्जों की मरम्मत नगर में कराता है और मरम्मत करने वाली फर्म को भेजा जाने वाला पत्र में मरम्मत के स्वरूप के संबंध में कोई निर्देश नहीं दिया जाता बल्कि उसमें केवल इतना उल्लेख किया जाता है कि उनके सम्बंध में प्रधान यांत्रिक (हैड मैकेनिक) समझा देगा और यदि हां तो मरम्मत का काम करने वाली फर्म को भेजे जाने वाले पत्र में मरम्मत का पूरा ब्यौरा क्यों नहीं दिया जाता?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) वर्ष 1942-43 के दौरान संयंत्र की मरम्मत पर खर्च की गई कुल राशि रु. 1,177-2-0 है।
(ख) प्रथम भाग का उत्तर हाँ में है। जहां तक द्वितीय भाग का संबंध है, केवल ऐसा ही काम बाहरी ऐजेंसी को दिया जाता है जो कि मुद्रणालय में नहीं किया जा सकता।
(ग) नहीं।
* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), 1943 का खण्ड 2, 30 मार्च, 1943, पृष्ठ 1585-86