विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 125
(घ) वहां काम को क्षति पहुंचाने बिना और स्टाफ स्थापना शाखा से नहीं हटाया जा सका।
(च) जी नहीं।
(छ) जी नहीं।
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* केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग में मदन सिंह बक्शी
की नियुक्ति के विरूद्ध अभ्यावेदन
211. सरदार संत सिंहः (क) क्या माननीय श्रम-सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या सच है कि केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग के वर्क्स अनुभाग में ‘‘अन्य अल्पसंयकों’’ के लिए आरक्षित रिक्ति के विरूद्ध किसी मदन सिंह बक्शी की सहायक के रूप में नियुक्ति की गई हैं_
(ख) क्या गृह विभाग द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अधीन भर्ती के समय उनके सिक्ख होने का अधिकृत प्रमाणपत्र उनसे मांगा गया था_ यदि नहीं तो, क्यों नहीं_
(ग) क्या सरकार को विदित है कि सेवा में आने से पूर्व बक्शी मदन सिंह 3 या 4 बार ‘‘पेटिट’’ रह चुका है तथा सिख समुदाय के लिए आरक्षित नौकरी प्राप्त करने के लिए सरकार को धोखा देने हेतु उन्होंने बाल बढ़ाये_
(घ) क्या यह सच है कि स्थानीय सिक्ख संगठनों द्वारा अपर मुख्य अभियंता तथा प्रशासनिक अधिकारी को अनेक अभ्यावेदन दिये गए, लेकिन अभी तक एक का भी जवाब नहीं दिया है_ और
(घ) क्या इस व्यक्ति के स्थान पर एक वास्तविक सिक्ख को रखने का सरकार का प्रस्ताव है?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) जी हाँ।
(ख) जी नहीं। सरकार को उसकी नियुक्ति के समय उसके सिक्ख होने पर कोई संदेह नहीं था।
(ग) जी नहीं। सरकार को इस संबंध में कोई जानकारी नहीं थी।
* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), 1943 का खण्ड 3, 2 अगस्त, 1943, पृष्ठ 426-27 @ प्रश्नकर्ता का कोटा समाप्त होने के कारण इस प्रश्न का उत्तर सभा पटल पर ख दिया गया।