103 भारत में पन-बिजली संभावनाओं का सर्वेक्षण - Page 142

विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 127

(ख) क्या सरकार नहीं मानती कि भारत के उत्तम श्रेणी के कोयला स्रोतों के संरक्षण की सामान्य रूप से स्वीकृत नीति को ध्यान में रखते हुए, पन-बिजली विकास कार्यों को सक्रिय रूप से प्रोत्साहन दिया जाना चाहिये, विशेषतया संयुक्त प्रदेशों यथा पंजाब तथा केन्द्रीय भारतीय राज्यों में जो कि भारत के कोयला आपूर्ति स्रोतों से दूर स्थित हैं_

(ग) बम्बई में टाटा तथा पड़ोसी राज्यों जैसे मैसूर तथा ट्रावनकोर संयुक्त प्रांतों और पंजाब सरकारों द्वारा विकसित राज्य पन-बिजली योजनाओं की अधिष्ठापित क्षमता कितनी है तथा वर्तमान में इन योजनाओं से उपलब्ध अनवशोषित भार कितना है_

(घ) क्या माननीय सदस्य का प्रत्येक उत्पादन योजनाओं से सम्भवतः प्राप्त होने वाली बिजली सहित, भारत में नई पन-बिजली योजनाओं के संभावित मुख्य कार्य-स्थलों से उनके ताजा आंकड़े दर्शाने वाला एक विवरण सभा पटल पर प्रस्तुत करने का विचार है_ और

(घ) क्या सरकार ने उन स्थानों पर जहां सस्ती बिजली प्राप्त की जा सकती है, रेलगाडि़यों को बिजली से चलाये जाने की संभावना पर विचार किया है?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) भारत सरकार के विद्युत आयुक्त द्वारा 1941 के आखिर में पूरे भारत में मुख्य पन-बिजली संभावनाओं का एक संक्षिप्त सर्वेक्षण किया गया था_

(ख) पन-बिजली योजनाओं का संवर्धन मुख्यतः प्रांतीय सरकारों और राज्यों का विषय है। फिर भी केन्द्रीय सरकार पन-बिजली विकास की वांछनीयता के बारे में पूरी तरह से जागरूक है तथा पन-बिजली विकास समेत विद्युत आपूर्ति उद्योग के युद्धोपरांत संगठन की ओर परिषद् की पुनर्गठन समिति ध्यान दे रही है।

(ग) तथा (घ) में पूछी गई सूचना का युद्धावधि में प्रकाशन करना जनहित में नहीं है। तथापि जैसाकि पहले बताया जा चुका है पन-बिजली योजनाओं का संवध र्न मुख्यतः प्रांतीय सरकारों तथा राज्यों का विषय है।

(घ) जी हाँ, प्रश्न पर समय-समय पर विचार किया जाता रहा है तथा इसे हमेशा ध्यान में रखा जाता है परन्तु किसी विशेष स्थान पर रेलगाडि़यों का बिजली से चलाया जाना वहां सस्ती बिजली की उपलब्धता पर निर्भर करता है।