विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 355
(ग) श्रम कल्याण अधिकारियों के कार्य इस प्रकार हैंः
(i) नियोजकों और कामगारों के बीच श्रमिक संबंधों और कार्य अवस्थाओं
के बारे में निकट सम्पर्क स्थापित करना।
(ii) नियोजकों और कामगारों के बीच उचित समझ-बूझ, घनिष्ट सहयोग
और कठिनाईयों की आपसी समझ में वृद्धि करना।
(iii) कामगारों के कल्याण के लिए रचनात्मक सुझाव देना तथा उपक्रम की
समस्त कल्याणकारी गतिविधियों का समन्वय और पर्यवेक्षण करना।
(iv) अपने आपको कामगारों की शिकायत से परिचित कराना और ऐसी
शिकायतों को दूर करवाने तथा साधारणतः मतभेद के कारणों को दूर
कराने का प्रयास करना।
जहां तक योग्यताओं का संबंध है, शैक्षिक योग्यताओं को उचित महत्त्व दिया जाता है, फिर भी अनिवार्य योग्यता यह है कि अभ्यर्थियों को सामाजिक कार्य का अनुभव होना चाहिए। लेकिन उन लोगों को अधिमान दिया जाता है जिन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय या सर दोराब जी टाटा ग्रेजुएट स्कूल ऑफ सोशल वर्क, बम्बई जैसे मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण पाठ्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।
प्रांतों में और खानों में इस समय लागू (या विचाराधीन) प्रसूति सुविधा संबंधी विधान के कुछ महत्त्वपूर्ण प्रावधानों को दर्शाने वाला तुलनात्मक विवरण
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