26 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
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* केन्द्रीय लेखन सामग्री (स्टेशनरी)
कार्यालय के काम के घंटे
25. सर अब्दुल हलीम गज़नवीः (क) क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या यह सच है कि क्या केन्द्रीय स्टेशनरी कार्यालय के काम के घंटों में तीस मिनट की वृद्धि कर दी गई है_
(ख) क्या यह सच है कि केन्द्रीय स्टेशनरी कार्यालय में पिछली रमज़ान के दौरान, मुसलमान कर्मचारियों को दी गई तीस मिनट की छूट को बंद कर दिया गया था, यदि हां तो क्यों_
(ग) क्या यह सच है कि केन्द्रीय स्टेशनरी कार्यालय की कुछ शखाओं में काम के घंटों में साठ मिनट की आगे और वृद्धि कर दी गई है_ और यदि हां तो क्या सरकार उन शाखाओं के कर्मचारियों को बढ़ाए गए समय के लिए समयोपरि भत्ता देने के लिए तैयार है?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) जी हाँ।
(ख) हाँ, छूट पहले स्थानीय सरकार के आदेशों के सदृश दी गई थी। इसे 1942 में समाप्त कर दिया गया था क्योंकि बंगाल सरकार ने जल्दी बंद करने के घंटों को दृष्टि में रखते हुए रियायत को बंद कर दिया था।
(ग) हाँ, केवल अल्पावधि के लिए एक अस्थाई उपाय के रूप में। रक्षा आपूर्ति सम्बंधी काम की अधिकता को पार करने के लिए कुछ शाखाओं के कर्मचारियों को एक घंटा अधिक समय तक कार्यालय में रूकने की आवश्यकता पड़ी। गैर-औद्योगिक कर्मचारियों को ऐसा अतिरिक्त समयोपरि भत्ता देने की प्रथा नहीं है।
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* कर्मचारियों को अपर्याप्त मंहगाई भत्ते की
स्वीकृति के संबंध में घोषणा
अध्यक्ष महोदय (माननीय हर अब्दुर रहीम)ः अगल प्रश्न भी श्री जमनादास मेहता के नाम में है। वह लोक/सार्वजनिक महत्व के एक अति आवश्यक निश्चित मामले पर चर्चा करना चाहते हैं, अर्थात् वह मामला है भारत सरकार की नौकरी में लगे
* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), 1943 का खण्ड 1, 11 फरवरी, 1943, पृष्ठ 72-73 * वही, 12 फरवरी, 1943, पृष्ठ, 169