विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 71
(ख) माफी का अभिप्राय यह नहीं है कि व्यवधान से पहले की उस अवधि को लिए जाने वाले वेतन के निर्धारण के लिए सेवा के रूप में गिना जाए। इसमें कोई गलती नहीं की गई।
(ग) नहीं।
(घ) प्रश्न नहीं उठता।
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* केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग में मुसलमान
इंजीनियरों आदि का अभाव
319. खान बहादुर शेख फ़ज़ले हक़ पिराचाः (क) क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे कि विमानन तथा पहुंच सड़क निर्माण सहित केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग में कार्यरत अधीक्षण अभियंतों, कार्यापालक अभियंताओं तथा उप-मंडलीय अधिकारियों (राजपत्रित तथा अराजपत्रित) की जाति-वार कितनी संख्या है_
(ख) क्या यह सच है कि उपर्युक्त प्रत्येक संवर्ग में मुसलमानों का प्रतिनिधित्व कम है और यदि हां तो मुसलमानों के कम-प्रतिनिधित्व को पूरा करने के लिए सरकार का क्या कार्रवाई करने का इरादा है?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) एक विवरण सभा पटल पर रख दिया गया है।
(ख) हाँ। मुसलमानों का कम प्रतिनिधित्व इस सच के कारण है कि अधिकांश नियुक्तियां विमानन के निर्माण कार्य के लिए की गई थी। ये कार्य तात्कालिक तथा महत्वपूर्ण थे और उनके लिए काफी बड़ी संख्या में अनुभवी तथा योग्य अधिकारियों की आवश्यकता थी। भारत को जापान की धमकी के कारण, इन अधिकारियों की आवश्यकता बहुत कम सूचना पर थी और यदि नियुक्तियां बिल्कुल साम्प्रदायिक रोस्टर के अनुसार की जाती तो उसके कारण उनमें विलम्ब होता जो देश की रक्षा के लिए अत्यंत हानिकारक होता। वे सब नियुक्तियां जिनके संबंध में साम्प्रदायिक नियमों का पालन नहीं किया गया है केवल अस्थायी हैं और जैसे ही वर्तमान संकटकाल समाप्त होगा सभी अनियमितताओं को ठीक कर दिया जाएगा।
* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), 1943 का खण्ड 2, 16 मार्च, 1943, पृष्ठ 1124-25