422 अतोलित खुदरा भाव सूचकांक का संकलन - Page 139

124 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

प्रोफेसर एन. जी. रंगा ः क्या ऐसी जांच कृषि मजदूरों के संबंध में कम से कम कुछ जांच के मामलों में की जाएगी?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः मैं इसका ध्यान रखूंगा यद्यपि मैं स्वयं इस बात का वचन नहीं दे सकता।

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ऽअतोलित खुदरा भाव सूचकांक का संकलन

1155. श्री एम. अनन्तशायनम अय्यंगर ः (क) क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे कि भारतीय श्रमिक (इंडियन लेबर गजट) में प्रकाशित उस देश के औद्योगिक शहर और नगर के बारे में दलों द्वारा अतोलित खुदरा भाव सूचकांक के संकलन के पीछे क्या उद्देश्य है_

(ख) क्या जनता को उन ग्रुपों की मदों और उनके गुणों के बारे में बताया गया जिनके बारे में खुदरा भाव सूचकांक का हिसाब लगाया गया था, यदि नहीं तो क्यों नहीं_

(ग) क्या माननीय सदस्य इस सदन के समक्ष प्रत्येक केन्द्र के प्रत्येक ग्रुप के लिए मदों की कुल संख्या रखेंगे जो श्रम विभाग द्वारा खुदरा भाव सूचकांक के लिए निर्मुक्त की गई है_ इस संबंध में क्या माननीय सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे कि इन मदों, उनके गुण और संख्या के निर्धारित करने की कसौटी क्या थी जिन पर ये अतोलित ग्रुप सूचकांक आधारित हैं?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः (क) भारत सरकार ने 1942 में यह निर्णय किया कि समान आधार पर रहन-सहन सूचकांक की लागत का संकलन किया जाए। चूँकि इस प्रकार के सुचकांक की तैयारी करने में कुछ समय लग जाने की संभावना है, यह महसूस किया गया कि खुदरा भाव विवरण उपलब्ध किए जाने चाहिए जो मजदूरी के विवादों में कुछ मूल्यवान हो सकते हैं। अतः प्रांतीय सरकारों से परामर्श करने के बाद अंतरिम कानून के रूप में यह निर्णय किया गया कि इस देश में कुछ चुने गए केन्द्रों के लिए भाव के विवरण संकलित किए जाएं और इस विवरण के अधार पर सूचकांक तैयार किए जाएं।

(ख) दलों (ग्रुपों) को बनाने वाली मदों का प्रकाशन नहीं किया गया है। इसका कोई विशेष कारण नहीं है अपितु गजट में सीमित स्थान की वांछनीयता है।

ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), खंड 4, 1946, 21 मार्च, 1946, पृष्ठ 2708