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136 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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ऽकरोल बाग, दिल्ली में अधिग्रहीत मकान

1259. श्री अहमद ई. एच. जफर ः (क) क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे कि सरकार इस तथ्य से अवगत है कि अधिकांश मामलों में, जहां करोल बाग, दिल्ली में अधिग्रहीत मकान आवंटियों द्वारा स्वीकार किए गए थे, ऐसे मकानों को अलग अलग आवंटियों ने काले बाजार की किराए की दरों पर उन आम व्यक्तियों को दर-किरायेदारी पर उठा दिए थे जो दिल्ली मे रहने के आवास के भारी अभाव के कारण अधिक किराए दे रहे थे_

(ख) क्या सरकार इस तथ्य से अवगत है कि इस प्राकर प्रचलित दर-किरायेदारी की इस प्रथा के बारे में सम्पदा कार्यालय ने जांच-पड़ताल की और यह पाया गया कि करोलबाग के घर सेख्या 6/73 के चार क्षेत्रों में से तीन फलैट दर-किरायेदारी पर उठे हुए हैं_

(ग) क्या यह सच है कि करोलबाग के अधिकांश मकान अभी तक आवंटित नहीं किए गए हैं और ऐसे मकानों का उपयोग केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग के स्थानीय कर्मचारी अपने निजी कार्यों के लिए करते हैं_ और

(घ) इन तथ्यों के परिप्रेक्ष्य में क्या सरकार यह प्रस्ताव करती है कि पूर्व प्रश्न के भाग (क) में उल्लिखित मकानों के पटट्े के समाप्त किए जाने के औचित्य पर विचार किया जाए ताकि उन्हें काले बाजार के लेन-देन और दुरूपयोग से बचाया जा सके और उन मकानों को जरूरतमंद आम जनता को उपलब्ध कराया जाए जिनमें से कई ऐसे सरकारी कर्मचारी हैं जो सरकारी आवास के लिए प्रतीक्षारत हैं?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः (क) नहीं।

(ख) यह सच है कि मकान संख्या 6/73 करोलबाग के चार फलैटों मे से दो फलैट दर-किराएदारी पर उठाए गए हैं परन्तु इस मामले से यह सिद्ध नहीं होता कि व्यापक रूप से दर-किराएदारी प्रचलित है।

(ग) नहीं।

(घ) सरकार ने करोल बाग क्षेत्र मे कुछ मकान पहले ही निर्मुत्तQ कर दिए हैं और इस बात की बराबर जांच की जा रही है कि जो मकान सरकार द्वारा आवश्यक नहीं है, उन्हें निर्मुत्तQ किया जाए जिन्हें सरकार उपयोग करने में असमर्थ है।

ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), खंड 4, 1946, 29 मार्च, 1946, पृष्ठ 1259