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ऽकोयला खानों में काम करने वाले खनिकों के
बच्चों की देखभाल के प्रबंध
1057. श्रीमती के. राधाबाई सुब्बारायण क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे कि :
(क) 21 फरवरी, 1995 को तारांकित प्रश्न संख्या 436 के दिए गए उत्तर के समय से खनिकों के बच्चों और अल्प आयु के शिशुओं की देखभाल के लिए व्यवस्था के बारे में सरकार को क्या सूचना प्राप्त हुई है_
(ख) प्रश्न के अनुपूरक प्रश्नों में उठाए गए मुद्दों के बारे में सरकार को क्या सूचना प्राप्त हुई है_ और
(ग) क्या खनिकों के अल्प आयु के शिशुओं और बच्चों को निःशुल्क दूध की सप्लाई की जाती है_ यदि हां तो प्रत्येक बच्चे को उसकी आयु के अनुसार कितना दूध दिया जाता है, और यदि नहीं तो दूध न दिए जाने के क्या कारण हैं?
माननीय डा. बी. आर. अम्बेडकरः (क) और (ख)_ मुझे अभी तक सभी मामलों में रिपोर्ट नहीं मिली है परन्तु सर्वप्रथम यह स्पष्ट करूंगा कि महिलाओं को भूमिगत स्थलों में काम करते समय अपने शिशुओं को अपने साथ ले जाने की नितांत निषेधाज्ञा है और महिलाओं को भी शिशु जन्म के बाद 4 सप्ताह तक भूमिगत स्थलों में काम करने की निषेधाज्ञा है।
महिला श्रम कल्याण अधिकारी द्वारा कुछ सप्ताह पूर्व पूछताछ की गई और यह विदित हुआ कि महिलाएं प्रसव के अधिक दिन बीत जाने पर सामान्य रूप से भूमिगत स्थलों में नहीं जाती और मैने एक विधेयक प्रस्तुत किया है जो अधिक लाभ प्राप्त करेगा और महिलाओं को शिशु के जन्म की प्रत्याशित तारीख से पूर्व 10 सप्ताह के लिए भूमिगत स्थलों में काम करने के लिए निषेधाज्ञा है।
ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), 1945 का खण्ड 1, 26 मार्च, 1945, पृष्ठ 2006.