312 असम परियोजनाओं पर भेजे गए चाय बागानों के मजदूर - Page 17

2 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अभी तक मैने निश्चित रूप से यह पता लगाया है कि माताओं को नियमित अंतराल पर अपने शिशुओं को दूध पिलाने के लिए खान की सतह पर आने की सुविधाएं विद्यमान नहीं हैं परन्तु महिला श्रम अधिकारी बताती है कि उन महिलाओं की यह प्रवृत्ति है जो अपने बच्चों को घर पर छोड़कर काम पर आती हैं, वे अपने घरों को वापस जाने के लिए कुछ पहले की खानों को छोड़ देती हैं।

(ग) कुछ ही खानों के मामले में सरकार खनन क्षेत्रों में महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य सुधार के संबंध में अधिक संभावनाओं की जांच कर रही है।

प्रो. एन. जी. रंगाः उन माताओं के लिए उस प्रवृत्ति के संबंध में, जिन्होने अपने बच्चों को घर पर छोड़ दिया है तथा खानों से कुछ पहले अपने घर लौटना चाहती हैं, क्या उन्हे अपनी मजदूरी में कोई हानि उठानी पड़ती है क्योंकि उन्होंने खानों को कुछ समय पूर्व छोड़ा है अथवा उन्हें किसी वेतन हानि के उठाए बिना खानों को कुछ समय पूर्व छोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः उन्हें अनुमान से एकमुश्त भुगतान किया जाता है_ यह उजरती काम होता है।

श्रीमती के. राधाबाई सुब्बारायणः वे लगातार एक साथ कितने घंटे कार्य करती हैं?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः यह उजरती काम है_ वे कभी भी आ सकती हैं और कभी भी जा सकती हैं।

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ऽअसम परियोजनाओं पर भेजे गए

चाय बागानों के मजदूर

1313. दीवान अब्दुल बासिथ चौधरीः (क) क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या वह इस तथ्य से अवगत हैं कि चाय बागानों के प्रबंधकों द्वारा अनेक व्यक्तियों को असम की परियोजनाओं में मजदूरों के रूप में भेजा गया है_

(ख) क्या माननीय सदस्य इस तथ्य से भी अवगत हैं कि उन अनेक मजदूरों के आश्रितों को अभी तक कोई मुआवजा नहीं दिया गया है जिन्होने परियोजना के कार्य में लगे रहने पर अपने प्राण गंवा दिए_

ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), खण्ड 1, 1945, 26 मार्च, 1945, पृष्ठ 2007