470 दिल्ली केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण का गठन - Page 206

विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 191

अन्तर का कारण यह है कि कलकत्ता और बम्बई में घरेलू और औद्योगिक बिजली की खपत अधिक है तथा इन नगरों में दिल्ली और नई दिल्ली के छोटे कारबारों की तुलना में बड़े कारबार होने से बिजली और उसकी दरों का बेहतर संतुलन है। इसके अलावा एक स्थान से दूसरे स्थान की परिस्थितियों में अन्तर होता है तथा इस बात पर भी अधिक निर्भर होना पड़ता है कि किस प्रकार के जेनेरेटर प्लांट उपयोग में आ रहे हैं तथा प्लांट से संबंधित अन्य सुविधाएं क्या हैं।

(ग) यह संभव नहीं है कि इस समय इस विषय पर कोई वत्तQव्य दिया जाए परन्तु माननीय सदस्य इस बात से आश्वस्त हो सकते हैं कि इस मामले पर बराबर ध्यान दिया जा रहा है।

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ऽदिल्ली केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण का गठन

1772. पंडित ठाकुरदास भार्गव ः क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे किः

(क) दिल्ली केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण कम्पनी लिमिटेड में कौन-कौन सदस्य हैं_

(ख) क्या यह सच है कि एक भारतीय के अलावा बोर्ड के सभी सदस्य युरोपीय हैं_

(ग) क्या यह सच है कि दिल्ली नगरपालिका के सदस्य को बोर्ड का प्रतिनिधि बनाया गया है_

(घ) क्या यह सच है कि दिल्ली नगरपालिका बोर्ड में एक सदस्य की अपेक्षा दो सदस्यों द्वारा प्रतिनिधित्व चाहती है_

(घ) क्या सरकार का यह प्रस्ताव है कि दिल्ली इलेक्ट्रिक और ट्रेकशन कंपनी लिमिटेड को अपने हाथ में ले ले और क्या ऊपर बताई गई कंपनी का दिल्ली सेण्ट्रल इलेक्ट्रिक पॉवर ऑथोरिटी कंपनी लिमिटेड के बोर्ड में प्रतिनिधि था_ और

(च) सरकार को दिल्ली इलेक्ट्रिक एण्ड ट्रेक्शन कम्पनी, लिमिटेड को अपने हाथ में लेने के बाद उसका भी प्रतिनिधित्व दिल्ली नगरपालिका को देकर नगरपालिका का प्रतिनिधित्व बढ़ाने में कोई आपत्ति है?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ः (क) शायद माननीय सदस्य दिल्ली सेण्ट्रल इलेक्ट्रिक पॉवर ऑथोरिटी का उल्लेख कर रहे हैं। इसकी सदस्यता इस प्रकार हैः

ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), खंड 5, 1946, 12 अप्रैल, 1946, पृष्ठ 3899