98 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
- मन सभी मानसिक प्रवृत्तियों में प्रधान है। यह सभी मानसिक-प्रवृत्तियों का
मुखिया है। उन्हीं मानसिक-प्रवृत्तियों से यह मन बना हुआ है। 4. इसलिए सबसे पहले मन का विकास करना है।
- उनकी शिक्षा की दूसरी विशेषता यह है कि हमारे भीतर उत्पन्न होने वाली
सभी अच्छी या बुरी प्रवृत्तियों का मूल स्रोत मन ही है, जिनका हमें बाहर से
शिकार होना पड़ता है।
- जो कुछ भी बुराई है, जो बुराई से संबंधित है, बुराई के साथ है-सभी मन की
उपज है, जो कुछ भी अच्छाई की है, अच्छाई से संबंधित है, अच्छाई के साथ
हैं-वह सब मन की उपज है।
- यदि कोई बुरे मन से बोलता या करता है तो दुःख उसके पीछे-पीछे ऐसे ही
हो लेता है जैसे गाड़ी के पहिए गाड़ी को खींचने वाले बैलों के पीछे-पीछे। 8. उनकी शिक्षाओं की तीसरी विशेषता है कि पापपूर्ण कार्यों से दूर रहो। 9. उनकी शिक्षा की चौथी विशेषता है कि असली धर्म धार्मिक पुस्तकों में नहीं
है, अपितु धार्मिक सिद्धांतों के विश्लेषण करना है।
- क्या कोई कह सकता है कि बुद्ध का धर्म उनके द्वारा बनाया गया नहीं हैं?