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(6) उन्होंने इस सिद्धांत का खंडन किया कि आदमी ईश्वर द्वारा निर्मित है
या वह किसी ब्रह्म के शरीर का अंश है।
(7) उन्होंने आत्मा के अस्तित्व की या तो उपेक्षा की या अस्वीकार किया।
2. वे बातें जिनमें उन्होंने परिवर्तन किया
- उन्होंने कार्य-कारण के महान नियम को उसके उप-सिद्धांतों सहित प्रतीत्य
समुत्पाद के रूप में मान्य ठहराया।
- उन्होंने भाग्यवादी मत एवं इसी तरह के मूर्खतापूर्ण मतों का खण्डन किया कि
किसी ईश्वर ने आदमी और विश्व के भविष्य को पहले से ही तय कर रखा
है।
- उन्होंने इस सिद्धांत को अस्वीकार कर दिया कि किसी पिछले जन्म में किए
गए कर्मों में इतनी सामर्थ्य है कि वे इस जन्म के कर्मों को निष्क्रिम करके
दुख का कारण बनें। उन्होंने कर्म के भाग्यवादी सिद्धांत को अस्वीकार कर
दिया। उन्होंने पुराने कर्मवाद सिद्धांत की जगह एक बहुत ही अधिक वैज्ञानिक
‘कर्मवाद’ की स्थापना की। उन्होंने पुरानी बोतल में नई सुरा भरने जैसा काम
किया।
- आवागमन आत्मा के संसरण के सिद्धांत की जगह असंसरित सिद्धांत स्थापित
किया।
- उन्होंने मोक्ष या आत्मा की मुक्ति के सिद्धांत की जगह निर्वाण के सिद्धांत को
स्थापित किया।
- इस प्रकार बुद्ध-शासन मौलिक है, जो कुछ इसमें पुराना है उसे या तो परिवर्तित
कर दिया गया या उसकी नई व्याख्या कर दी गई।
3. वे बातें जिन्हें उन्होंने स्वीकार किया
- उनकी शिक्षा की पहली विशेषता इस बात में हैं कि मन को सभी छह चीजों
का केन्द्र-बिन्दु माना गया।
- मन सभी चीजों का पूर्वगामी है, वह उस पर प्रभाव डालता है, उनका निर्माण
करता है। यदि मन में समझ है, तो सभी चीजें समझ में आ जाती हैं।