164 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
1. गँवार ब्राह्मणों का धर्म-दीक्षा
- राजगृह के निकट, गृद्धकूट पर्वतों के पीछे एक गाँव था, जिसमें लगभग सत्तर
परिवार थे, जो सभी ब्राह्मणों के थे।
- बुद्ध इन लोगों को धर्म-दीक्षा देने के उद्देश्य से इस स्थल पर आये और एक
वृक्ष के नीचे बैठ गये।
- जब लोगों ने तथागत का तेज और गम्भीर व्यक्तित्व देखा, तो उससे प्रभावित
होकर उनके चारों ओर इकट्ठा हो गये, इस पर उन्होंने ब्राह्मणों से पूछा, तुम!
कब से इस पहाड़ के नीचे रह रहे हैं, और उनका व्यवसाय क्या था।
- इस पर उनका उत्तर था, ‘‘पिछली तीस पीढि़यों से हम यहाँ रह रहे हैं, और
हमारा व्यवसाय पशुपालन है।’’
- और आगे उनके धार्मिक विश्वास के विषय में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘‘हम
विभिन्न ऋतुओं के अनुसार सूर्य, चन्द्रमा, इन्द्र और अग्नि आदि की पूजा और
यज्ञ करते हैं।’’
- ‘‘यदि हम में से कोई मृत्यु को प्राप्त होता है, तो हम एकत्रित होते हैं और
प्रार्थना करते हैं कि वह ब्रह्म लोग में उत्पन्न हो, जिससे वह पुनर्जन्मों से बच
जाये।’’
- बुद्ध ने उत्तर दिया, ‘‘यह सुरक्षित तरीका नहीं है, इसके द्वारा तुम्हें लाभ नहीं
हो सकता। सच्चा मार्ग मेरा अनुसरण करना है, सच्चे तपस्वी बनो, और निर्वाण
को प्राप्त करने का उद्देश्य लेकर सम्पूर्ण आत्म-संयम का अभ्यास करो।’’ और
तब उन्होंने इन पंक्तियों को जोड़ाः
- ‘‘जो सत्य को असत्य मानते हैं, और असत्य को सत्य मानते हैं, वे केवल
मिथ्या दृष्टि को अपनाते हैं, इससे कभी सच्चा लाभ नहीं प्राप्त होगा।’’
- ‘‘किन्तु सत्य को सत्य के रूप में जानता और असत्य को असत्य के रूप
में समझता है, यही आदर्श सम्यक दृष्टि है, और उसी से सद्गति का लाभ
होगा।’’
‘‘संसार में सर्वत्र मृत्यु विद्यमान है, कहीं भी उससे छुटकारा नहीं है।’’
‘‘यह समझ लेना कि जो पैदा हुआ है, उसे एक न एक दिन अवश्य मरना