अध्याय-तीन
भाग- I
- भगवान् बुद्ध ने अपने धम्म में स्वयं के लिए कुछ भी 193
स्थान नहीं रखा।
- भगवान् बुद्ध ने कभी किसी को मुक्ति का वचन नहीं दिया। 195
उन्होंने कहा कि वे मार्गदाता, हैं मोक्षदाता नहीं।
- बुद्ध ने अपने लिए यह अपने धम्म के लिए किसी दैवत्व का 200
दावा नहीं किया। धम्म मनुष्य द्वारा मनुष्य के लिए आविष्कृत था।
यह एक अपौरुषेय धम्म नहीं था। भाग- II
भगवान बुद्ध के धम्म के विषय में विभिन्न दृष्टिकोण
- दूसरों ने उनके उपदेशों को किस प्रकार समझा 202
- भगवान बुद्ध का अपना वर्गीकरण 203 भाग- III
धम्म क्या है?
- जीवन की पवित्रता बनाये रखना धम्म है 206
- जीवन में पूर्णता तक पहुँचना ही धम्म है 209
- निर्वाण प्राप्त करना धम्म है 210
- तृष्णा का त्याग करना धम्म है 216
- सभी संस्कार अनित्य हैं-यह मानना धम्म है 217
- ‘कर्म’ कौ नैतिक व्यवस्था का साधन मानना धम्म है 219 भाग- IV
अ-धम्म क्या है?
- परा-प्राकृतिक में विश्वास अ-धम्म है। 224
- ईश्वर के अस्तित्व में विश्वास अ-ध्म्म है। 225
- ब्रह्म से संयोजन पर आधारित धम्म मिथ्या धम्म है। 226
- आत्मा में विश्वास अ-धम्म है। 234
- यज्ञ (बलि-कर्म) में विश्वास अ-धम्म है। 240
- कल्पनाश्रित विश्वास अ-धम्म है। 245
- कर्म के ग्रंथों का वाचन मात्रा अ-धम्म है। 247
- धर्म-ग्रन्थों की गलती को सम्भावना से परे मानना अ-धम्म है। 251