5. कोढ़ी सुप्रबुद्ध की धर्म-दीक्षा - Page 203

174 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

देखते ही वह जान गये, ‘‘यह सत्य को समझ सकता है।’’ 8. अतः कोढ़ी सुप्रबुद्ध के लिये तथागत ने क्रमशः इन विषयों से सम्बन्धित एक धर्मोपदेश

दिया। भिक्षादान पर, पवित्र जीवन पर, स्वर्ग-लोक पर और उन्होंने काम-सुखों की

तुच्छता और निरर्थकता तथा आश्रवों से मुक्ति के लाभ का निर्देश दिया। 9. जब तथागत ने देखा कि कोढ़ी सुप्रबुद्ध का चित्त विनम्र हो गया, आज्ञाकारी

हो गया, मुक्त हो गया, ऊपर उठ गया और श्रद्धा से पूर्ण हो गया, तब उन्होंने

उसे बुद्धों के सर्वोत्कृष्ट धम्म का उपदेश दिया, अर्थात्, दुःख, दुख समुदय,

दुख निरोध और दुख निरोध की ओर से जाना वाला मार्ग।

  1. जिस प्रकार एक श्वेत वस्त्र, दाग-धब्बों से मुक्त, रंग को अच्छी तरह ग्रहण

करने के लिये तैयार है, उसी प्रकार कोढ़ी सुप्प्रबुद्ध में, जैसे कि वह ठीक उसी

स्थल पर बैठा था, सत्य की शुद्ध विमला प्रज्ञा उत्पन्न हुई, यह सत्य कि जिस

किसी का भी प्रारम्भ है, उसका अवश्य ही एक अन्त भी होगा। और कोढ़ी

सुप्रबुद्ध ने सत्य को देखा, सत्य तक पहुँचा, सत्य का अनुभव किया, सत्य में

निमग्न हो गया, सन्देह के परे चले गया, सभी जिज्ञासाओं से मुक्त हो गया,

विश्वास जीत लिया, और उसे और कुछ भी करणीय नहीं रहा, तथागत की

देशना पर सुप्रतिष्ठित होकर, अपने आसन से ऊपर उठकर और तथागत के

समीप जाकर, और वहाँ एक ओर वह बैठ गया।

  1. इस प्रकार बैठे हुए उसने तथागत से कहा, ‘‘अद्भुत, हे भगवन्! अद्भुत, हे भगवन्

जिस प्रकार कोई गिरे हुए को उठा ले, छुपे हुए को खोज ले किसी रास्ता भूले

को रास्ता दिखा दे, अन्धकार में एक प्रदीप दर्शा दे, जिससे जिनके पास आँखें हैं,

वे आकारों को देख सकें, इसी प्रकार तथागत ने नाना प्रकार से सत्य की व्याख्या

की। मैं, यहाँ तक कि मैं, भगवन् बुद्ध, धर्म और भिक्षुओं के संघ की शरण ग्रहण

करता हूँ। कृपया तथागत! मुझे अपने शिष्य के रूप में स्वीकार कर लें। भगवान

आज से मेरे प्राण रहने तक मुझे अपना शरणागत उपासक समझें।’’ 12. इसके बाद कोढ़ी सुप्रबुद्ध तथागत की पुण्य वाणी से प्रसन्न हुआ, उनकी वाणी

की प्रशंसा और स्वागत करके, धन्यवाद देकर, अपने आसन से उठा, दाहिनी

ओर से तथागत का अभिवादन किया और चला गया।

  1. संयोगवश ऐसा हुआ कि एक तरुण बछड़े ने कोढ़ी सुप्रबुद्ध को उठाकर पटक

दिया और सींग घुसाकर जान से मान डाला।