202 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
1. दूसरों ने उनके उपदेशों को किस प्रकार समझा
भगवान बुद्ध की यथार्थ शिक्षायें क्या हैं?
यह एक प्रश्न है, जिस पर बुद्ध के कोई दो अनुयायी या बौद्ध धम्म के कोई
दो विद्यार्थी एकमत नहीं प्रतीत होते।
कुछ के लिये ‘समाधि’ ही उनकी प्रमुख शिक्षा है।
कुछ के लिये ‘विपश्यना’ ही है।
कुछ के लिये बौद्ध धम्म चन्द विशेष रूप से दीक्षित लोगों का धर्म है। दूसरों
के लिये यह लोकप्रचलित धर्म है।
कुछ के लिये यह शुष्क दार्शनिकता के अतिरिक्त और कुछ नहीं है।
कुछ के लिये यह मात्र रहस्यवाद है।
कुछ के लिये यह संसार से स्वार्थ-पूर्ण पलायन है।
कुछ के लिये यह हृदय के प्रत्येक आवेग और भावना का एक व्यवस्थित निरोध
है।
- बौद्ध धम्म के सम्बन्ध में नाना प्रकार के अनेक दृष्टिकोण एकत्रित किये जा
सकते हैं।
इन दृष्टिकोणों की भिन्नता एवं विरोध आश्चर्यजनक है।
इन दृष्टिकोणों में से कुछ ऐसे लोगों के दृष्टिकोण हैं, जिन्हें कुछ खास वस्तुओं
से मोह है। ऐसे लोग वे हैं जो समझते हैं कि बौद्ध-धम्म का सार समाधि,
विप्पस्सना या चन्द दीक्षित लोगों का धर्म होने में है।
- दूसरे दृष्टिकोण इस तथ्य का परिणाम हैं कि बौद्ध धम्म के विषय में लिखने
वाले लेखकों में से बहुसंख्यक प्राचीन भारतीय इतिहास के विद्यार्थी हैं। बौद्ध
धर्म का उनका अध्ययन आकस्मिक है और प्रासंगिक है।
उनमें से कुछ बौद्ध धम्म के विद्यार्थी हैं ही नहीं।
यहाँ तक कि वे नृवंश-शास्त्र के विद्यार्थी भी नहीं हैं, ऐसी विषय-वस्तु जो
धम्म की उत्पत्ति और विकास से सम्बन्ध रखती है।
- प्रश्न उत्पन्न होता है-‘क्या भगवान बुद्ध का कोई सामाजिक सन्देश नहीं है?’