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- जब उत्तर देने के लिये जोर डाला जाता है, तो बौद्ध धम्म के पण्डित प्रायः दो
बातों का विशेष उल्लेख करते हैं। वे कहते हैंः-
भगवान बुद्ध ने अहिंसा की शिक्षा दी थी।
भगवान बुद्ध ने शान्ति की शिक्षा दी थी।
‘‘क्या बुद्ध ने कोई दूसरा सामाजिक सन्देश दिया है?’’
‘‘क्या बुद्ध ने न्याय की शिक्षा दी?’’
’‘क्या बुद्ध ने मैत्री की शिक्षा दी?’’
‘‘क्या बुद्ध ने स्वतंत्रता की शिक्षा दी?’’
‘‘क्या बुद्ध ने समानता की शिक्षा दी?’’
‘‘क्या बुद्ध ने भ्रातृभाव की शिक्षा दी?’’
‘‘क्या बुद्ध कार्ल मार्क्स का उत्तर दे सकते हैं?’’
बुद्ध के धम्म पर चर्चा करते समय ये प्रश्न मुश्किल से ही कभी उठाये जाते
हैं।
- मेरा उत्तर है कि बुद्ध का एक सामाजिक सन्देश है। वे इन सभी प्रश्नों का
उत्तर देते हैं। किन्तु, वे सभी आधुनिक लेखकों द्वारा दफना दिए गए हैं।
2. भगवान बुद्ध का अपना वर्गीकरण
भगवान बुद्ध ने धम्म का अपने ढंग का वर्गीकरण अपनाया है।
पहले वर्ग को उन्होंने ‘धम्म’ कहा है।
उन्होंने एक दूसरा वर्ग माना है जो धम्म नहीं (अधम्म) नामक एक नये वर्ग
की रचना की वह भी धम्म के नाम से ही जाना जाता है।
उन्होंने एक तीसरे वर्ग की रचना की जिसे उन्होंने ‘सद्धम्म’ कहा है।
तीसरा वर्ग धम्म के दर्शन का एक दूसरा नाम था।
उनके धम्म को समझने के लिये आवश्यक है कि तीनों वर्गों को भली-भांति
समझा जाये-धम्म, अधम्म और सद्धम्म।