| kfj;k¡ dh tk,\ y, lkFkh | Col2 |
|---|---|
निर्वाण सम्बन्धी प्रवचन
- निर्वाण क्या है? 366
- निर्वाण के मूलाधार 367
| Col1 | Col2 |
|---|---|
धम्म सम्बन्धी प्रवचन
- सम्यक्-दृष्टि का पहला स्थान क्यों हैं? 369
- मरणोपरान्त जीवन की चिन्ता व्यर्थ 369
- ‘ईश्वर’ से प्रार्थनाएं और याचनाएं करना व्यर्थ 370
- मनुष्य का भोजन उसे ‘पवित्र’ नहीं बनाता 371
- भोजन नहीं, कुशल कर्मों का महत्त्व है 372
- बाह्य-शुद्धि अपर्याप्त है 374
- पवित्र जीवन क्या है? 375 परिच्छेद-छह
सामाजिक-राजनैतिक प्रश्नों पर प्रवचन
- राजाओं के अनुग्रह पर निर्भर मत रहो 376
- यदि राजा सदाचारी होगा, तो उसकी प्रजा भी सदाचारी होगी 376
- राजनैतिक और सामरिक शक्ति सामाजिक व्यवस्था पर निर्भर करती है 377
- युद्ध अनुचित है 379
- युद्ध विजेता के कर्त्तव्य 380
| Col1 | Col2 |
|---|---|
भाग- I
संघ
- संघ और उसका संगठन 385
- संघ में प्रवेश 385
- भिक्षु और उसके व्रत 387
- भिक्षु और सांघिक नियम संबंधी अपराध 389
- भिक्षु और संयम (प्रतिबन्ध) 389
- भिक्षु और शिष्टाचार के नियम 390
- भिक्षु और अपराध-परीक्षण 391