HI/Volume_22 - Page 24

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निर्वाण सम्बन्धी प्रवचन

  1. निर्वाण क्या है? 366
  2. निर्वाण के मूलाधार 367
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धम्म सम्बन्धी प्रवचन

  1. सम्यक्-दृष्टि का पहला स्थान क्यों हैं? 369
  2. मरणोपरान्त जीवन की चिन्ता व्यर्थ 369
  3. ‘ईश्वर’ से प्रार्थनाएं और याचनाएं करना व्यर्थ 370
  4. मनुष्य का भोजन उसे ‘पवित्र’ नहीं बनाता 371
  5. भोजन नहीं, कुशल कर्मों का महत्त्व है 372
  6. बाह्य-शुद्धि अपर्याप्त है 374
  7. पवित्र जीवन क्या है? 375 परिच्छेद-छह

सामाजिक-राजनैतिक प्रश्नों पर प्रवचन

  1. राजाओं के अनुग्रह पर निर्भर मत रहो 376
  2. यदि राजा सदाचारी होगा, तो उसकी प्रजा भी सदाचारी होगी 376
  3. राजनैतिक और सामरिक शक्ति सामाजिक व्यवस्था पर निर्भर करती है 377
  4. युद्ध अनुचित है 379
  5. युद्ध विजेता के कर्त्तव्य 380
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भाग- I

संघ

  1. संघ और उसका संगठन 385
  2. संघ में प्रवेश 385
  3. भिक्षु और उसके व्रत 387
  4. भिक्षु और सांघिक नियम संबंधी अपराध 389
  5. भिक्षु और संयम (प्रतिबन्ध) 389
  6. भिक्षु और शिष्टाचार के नियम 390
  7. भिक्षु और अपराध-परीक्षण 391