HI/Volume_22 - Page 23

  1. लोभ और तृष्णा 327
  2. क्लेश और द्वेष 328
  3. क्रोध और शत्रुता 329
  4. मनुष्य, मन और मन का मैल 330
  5. स्वयं के बारे में और स्व-विजय 331
  6. बुद्धि, न्याय और सुसंगति 333
  7. चित्त की सतर्कता और एकाग्रता 336
  8. सावधानी, अप्रमाद और निर्भीकता 338
  9. दुख, सुख तथा दान और करुणा 338
  10. ढोंग 340
  11. सम्यक् मार्ग का अनुसरण 340
  12. सद्धम्म के साथ मिथ्या धर्म को मत मिलाओ 342 भाग- IV

तथागत की देशनाएं

परिच्छेद-एक

गृहस्थों के लिए प्रवचन

  1. सुखी-गृहस्थ 346
  2. पुत्री पुत्र से अच्छी हो सकती है 346
  3. पति और पत्नी 347
izo p

परिच्छेद-दो

सुचरित्र बने रहने के लिए प्रवचन

  1. मनुष्य का पतन कैसे होता है? 349
  2. दुष्ट मनुष्य 350
  3. सर्वश्रेष्ठ मनुष्य 351
  4. प्रबुद्ध मनुष्य 352
  5. न्यायी और सज्जन मनुष्य 353
  6. शुभ-कर्म करने की आवश्यकता 354
  7. शुभ संकल्प करने की आवश्यकता 355 परिच्छेद-तीन

सदाचरण सम्बन्धी प्रवचन

  1. सदाचरण क्या है? 356
  2. सदाचरण की आवश्यकता 359