- लोभ और तृष्णा 327
- क्लेश और द्वेष 328
- क्रोध और शत्रुता 329
- मनुष्य, मन और मन का मैल 330
- स्वयं के बारे में और स्व-विजय 331
- बुद्धि, न्याय और सुसंगति 333
- चित्त की सतर्कता और एकाग्रता 336
- सावधानी, अप्रमाद और निर्भीकता 338
- दुख, सुख तथा दान और करुणा 338
- ढोंग 340
- सम्यक् मार्ग का अनुसरण 340
- सद्धम्म के साथ मिथ्या धर्म को मत मिलाओ 342 भाग- IV
तथागत की देशनाएं
परिच्छेद-एक
गृहस्थों के लिए प्रवचन
- सुखी-गृहस्थ 346
- पुत्री पुत्र से अच्छी हो सकती है 346
- पति और पत्नी 347
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परिच्छेद-दो
सुचरित्र बने रहने के लिए प्रवचन
- मनुष्य का पतन कैसे होता है? 349
- दुष्ट मनुष्य 350
- सर्वश्रेष्ठ मनुष्य 351
- प्रबुद्ध मनुष्य 352
- न्यायी और सज्जन मनुष्य 353
- शुभ-कर्म करने की आवश्यकता 354
- शुभ संकल्प करने की आवश्यकता 355 परिच्छेद-तीन
सदाचरण सम्बन्धी प्रवचन
- सदाचरण क्या है? 356
- सदाचरण की आवश्यकता 359