284 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
- क्या वह अधिक श्रेष्ठतर धम्म नहीं है, जो स्वयं के सुख के साथ ही साथ
दूसरों के सुखों में वृद्धि करता है और किसी भी प्रकार के अत्याचार को सहन
नहीं करता?
- ये कुछ प्रासंगिक प्रश्न थे जो उन्होंने उन ब्राह्मणों से पूछे जो समानता के विरोधी
थे।
- भगवान बुद्ध का धम्म मनुष्य की स्वयं अपनी पुण्य-परक मनोवृत्ति में से उत्पन्न
होने वाला पूर्णतया न्याय-संगत ‘धम्म’ है।