1. उनका कुल - Page 32

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1. उनका कुल

  1. अतीत में देखने पर हमें ज्ञात होता है कि ईसा पूर्व छठी शताब्दी में उत्तर भारत

में कोई प्रभुसत्ता-सम्पन्न राज्य नहीं था।

  1. देश छोटे-बड़े अनेक राज्यों में बंटा हुआ था। इनमें से कुछ राजतंत्रीय थे और

कुछ अराजतंत्रीय।

  1. राजतंत्रीय राज्यों (जनपदों) की संख्या सोलह थी, वे अंग, मगध, कासी, कोसल,

वज्जि, मल्ल, चेदि, वत्स कुरु, पांचाल, मत्स्य, सौरसेन, अष्मक, अवन्ति, गंधार

व कम्बोज के नाम से जाने जाते थे।

  1. जिन राज्यों में किसी एक राजा का आधिपत्य नहीं था, वे थे, कपिलवस्तु के

शाक्य, पावा एवं कुशीसिनारा के मल्ल, वैशाली के लिच्छवि, मिथिला के

विदेह, रामगाम के कोलिय, अल्लकप्प के बुलि, कालाम, केसपुत्त के कलिंग,

पिप्पलवन के मौर्य तथा भग्ग थे जिनकी राजधानी सिंसुमार गिरि में थी।

  1. राजतंत्रीय राज्य जनपद और जिन राज्यों पर किसी राजा का आधिपत्य नहीं था

वह राज्य संघ या गण कहलाते थे।

  1. कपिलवस्तु के शाक्यों की राज्य-व्यवस्था के बारे में यह जानकारी नहीं है कि

वह गणतंत्र था अथवा कुछ लोगों का कुलतंत्र कहलाते थे।

  1. फिर भी, इतना निश्चित रूप से मालूम है कि शाक्यों के गणतंत्र में अनेक

राज-परिवार थे जो बारी-बारी से राज करते थे।

  1. राज-परिवार का प्रधान ‘राजा’ कहा जाता था।

  2. सिद्धार्थ गौतम के जन्म के समय राजा बनने की बारी शुद्धोदन की थी।

  3. शाक्यों का राज्य भारत के उत्तर-पूर्वी कोने में था। यह एक स्वतंत्र राज्य था।

परन्तु बाद में कोशल नरेश इस पर अपनी प्रभुता स्थापित करने में सफल हो

गया।

  1. इस प्रभुता का परिणाम यह हुआ कि शाक्य राज्य कुछ राजकीय अधिकारों का

प्रयोग कोसल-नरेश की स्वीकृति के बिना नहीं कर सकता था।

  1. तत्कालीन साम्राज्यों में कोसल एक शक्तिशाली साम्राज्य था। इसी प्रकार मगध

भी एक शक्तिशाली साम्राज्य था। कोसल-नरेश प्रसेनजित और मगध-नरेश

बिम्बिसार सिद्धार्थ गौतम के समकालीन थे।