4 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
2. उनके पूर्वज
- शाक्यों की राजधानी कपिलवस्तु थी। संभवतः, यह नाम बुद्धिवादी कपिल मुनि
के नाम पर पड़ा हो।
- कपिलवस्तु में जयसेन नाम का एक शाक्य रहता था। सिनहू उसका पुत्र था।
सिनहू का विवाह कच्चाना से हुआ था। सिनहू के पांच पुत्र थे-शुद्धोदन, धोतोदन,
सक्कोदन, शुक्लोदन तथा अमितोदन। पांच पुत्रों के अलावा सिनहू के अमिता
तथा पमिता नाम की दो पुत्रियां थीं।
परिवार का गौत्र आदित्य था।
शुद्धोदन का विवाह महामाया से हुआ था। उसके पिता का नाम अ×जन और
मां का नाम सुलक्षणा था। अ×जन एक कोलिय था और वह देवदह नामक गांव
का रहने वाला था।
- शुद्धोदन महान योद्धा सैन्य-बल संपन्न व्यक्ति था। जब शुद्धोदन ने अपनी
वीरता का परिचय दिया, तो उसे विवाह करने की अनुमति मिल गई और उसने
महाप्रजापति को चुना। वह महामाया की बड़ी बहन थी।
- शुद्धोदन धनी व्यक्ति था। वह अपार भू-संपदा का स्वामी था और उसके अधीन
बहुत नौकर चाकर थे। ऐसा कहा जाता है कि अपनी भूमि को जोतने के लिए
उसे एक हजार हल चलवाने पड़ते थे।
- वह विलासितापूर्ण जीवन बिताता था और उसके कई महल थे।
3. उनका जन्म
- सिद्धार्थ गौतम का जन्म शुद्धोदन के यहां हुआ और उनके जन्म की कथा इस
प्रकार है-
- शाक्यों में एक वार्षिक मध्यग्रीष्मकालीन महोत्सव आषाढ़ के महीने में मनाने
की प्रथा थी। यह महोत्सव संपूर्ण राज्य में सभी शाक्यों और राज-परिवार के
सदस्यों द्वारा मनाया जाता था।
सामान्यतः महोत्सव सात दिनों तक चलता था।
एक बार महामाया ने इस महोत्सव को खूब धूम-धाम और भव्यता से, फूलों
के साथ लेकिन मादक पेयों के बिना ही मनाने का निश्चय किया।