13. सद्धम्म के साथ मिथ्या धर्म को मत मिलाओ - Page 371

342 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

  1. जिसके अशुभ कर्म-शुभ-कर्मों द्वारा ढँक दिये गये हैं, वे बादलों से मुक्त चन्द्रमा

की तरह इस संसार को प्रकाशित कर देता है।

  1. यदि एक मनुष्य सत्य धम्म का उल्लंघन कर झूठ बोलता है, तो उसके लिए

कोई ऐसा पाप नहीं, जो वह नहीं कर सकता।

  1. जो सदैव जागरूक रहते हैं, जो दिन और रात अध्ययन करते हैं और जो निर्वाण

के लिये प्रयासरत हैं, उनके आस्रव अस्त हो जाते हैं।

  1. यह पुरानी बात है। लोग उसकी निन्दा करते हैं, जो शान्त बैठा रहता है। वे

उसकी भी निन्दा करते हैं, जो बहुत अधिक बोलता है। वे उसकी भी निन्दा

करते हैं, जो कम बोलता है। पृथ्वी पर ऐसा कोई नहीं है, जिसकी निन्दा न

की जाती हो।

  1. ऐसा मनुष्य न तो कभी था और न कभी होगा और न अब कहीं है जिसकी

सदैव निन्दा ही निन्दा होती हो या जिसकी सदैव प्रशंसा ही प्रशंसा होती हो। 24. वाणी के क्रोध से सावधान रहो और अपनी जिह्वा पर नियन्त्रण रखें। मन के

पापों का त्याग कर दो और अपने मन से शील का अभ्यास करो। 25. अप्रमाद निर्वाण का मार्ग है, प्रमाद मृत्यु का मार्ग है। जो अप्रमादी हैं, वे नहीं

मरते। जो प्रमादी हैं, वे पहले से ही मरे के समान हैं।

13. सद्धम्म के साथ मिथ्या धम्म को मत मिलाओ

  1. वे जो मिथ्या को सत्य और सत्य को मिथ्या समझ बैठते हैं, ऐसे मिथ्या दृष्टि

सम्पन्न लोग कभी सत्य तक नहीं पहुँच पाते।

  1. वे जो सत्य को सत्य और मिथ्या को मिथ्या समझते हैं, वे ही सम्यक् दृष्टि

सम्पन्न सत्य तक पहुँचते हैं।

  1. जिस प्रकार ठीक से न छाये मकान में वर्षा जल प्रवेश कर जाता है, उसी

प्रकार साधना-रहित चित्त में राग प्रवेश कर जाता है।

  1. जिस प्रकार भली-भाँति छाये मकान में वर्षा जल प्रवेश नहीं कर पाता, उसी

प्रकार साधना युक्त चित्त में राग प्रवेश नहीं कर पाता।

  1. उठो! प्रमादी मत बनो! सन्मार्ग पर चलो। जो सन्मार्ग पर चलता है, वह इस

लोक में और दूसरे सभी लोकों में सुखी रहता है।

  1. सन्मार्ग पर चलो! ऐसे मार्गों पर मत चलो, जो कुमार्ग हैं। जो सन्मार्ग पर चलता

है वह इस लोक तथा दूसरे सभी लोकों में सुखी रहता है।