2. संघ में प्रवेश - Page 414

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1. संघ और उसका संगठन

  1. भगवान बुद्ध के अनुयायी दो वर्गों में विभक्त थे, भिक्षु और गृहस्थ अनुयायी,

जो उपासक कहलाते थे।

  1. भिक्षु एक संघ में संगठित थे, जबकि गृहस्थ नहीं थे।

  2. बौद्ध भिक्षु मुख्यतः एक परिव्राजक होता है। यह परिव्राजक संस्था बौद्ध भिक्षु

की अपेक्षा प्राचीन है।

  1. प्राचीन परिव्राजक ऐसे लोग थे, जिन्होंने पारिवारिक जीवन का त्याग कर दिया

था और धुमन्तुओं का एक मात्र अस्थायी समूह थे।

  1. वे विभिन्न आचार्यों और दार्शनिकों के सम्पर्क में आकर, उनके प्रवचनों को

सुनकर, नैतिकता, दर्शन, प्रकृति, रहस्यवाद, इत्यादि विषयों पर परिचर्चा में प्रवेश

कर सत्य को जान लेने के उद्देश्य से इधर-उधर घूमा करते थे। 6. पुराने प्रकार के परिव्राजकों में से कुछ ऐसे थे, जो जब तक उन्हें कोई दूसरा

गुरु नहीं मिले, तब तक किसी एक आचार्य के अधीन रहते थे। कुछ दूसरे थे

बिना किसी को अपना गुरु माने अकेले ही रहते थे।

  1. इस पुराने प्रकार के परिव्राजकों के मध्य स्त्री घुमन्तु भी होती थी। स्त्री परिव्राजकाएँ

कभी-कभी पुरुष परिव्राजकों के साथ रहती थीं, कभी-कभी वे स्वयं ही अकेले

रहती थीं।

  1. इन पुराने प्रकार के परिव्राजकों का कोई संघ नहीं था, अनुशासन के कोई नियम

नहीं थे और प्रयास करने के लिये कोई आदर्श नहीं था।

  1. ऐसा पहली बार हुआ था कि तथागत ने अपने अनुयायियों को एक संघ या

भ्रातृत्व में संगठित किया था, और उन्हें अनुशासन के नियम दिये और उनके

समक्ष आगे बढ़ने और कार्यान्वित करने के लिये एक आदर्श प्रस्तुत किया

था।

2. संघ में प्रवेश

  1. संघ सभी के लिये खुला था।

  2. संघ में प्रवेश के लिए जाति-पाँति की कोई बाधा नहीं थी।

  3. लिंग की भी कोई बाधा नहीं थी। स्त्री पुरुष की भी कोई बाधा नहीं थी।

  4. हैसियत की कोई बाधा नहीं थी।