428 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
- तब उग्गह ने देखा कि तथागत ने उसका निमन्त्रण स्वीकार कर लिया है, अपने
आसन से उठा, अभिवादन किया, और जाने की आज्ञा ले, तथागत की प्रदक्षिणा
करके चला गया।
- रात के बीत जाने पर दूसरे दिन तथागत ने प्रातः चीवर धारण किया, पात्र और
चीवर ले उग्गह के घर गये, और वहाँ सुसज्जित आस पर बैठ गये। उग्गह ने स्वयं
अपने हाथों से भोजन परोसा और विविध व्यंजनों से तथागत को सन्तुष्ट किया। 6. और तब तथागत ने अपने पात्र से अपना हाथ खींच लिया अर्थात् भोजन समाप्त
कर लिया तो वह एक और बैठ गया। इस प्रकार बैठे हुए, उसने कहाः 7. ‘‘भगवान्! ये मेरी लड़कियाँ अपने-अपने पतियों के परिवारों में जाएँगी_ भगवान्
कृपया इन्हें परामर्श दें, तथागत उन्हें सलाह दें, जो चिरकाल तक उनके हित व
सुख का कारण बने।’’
- तब तथागत ने उनसे कहा, ‘‘लड़कियो! इन कारणों से इस प्रकार से स्वयं अभ्यास करो
कि हमारा हित चाहने वाले, हमारी खुशी खोजने वाले तथा दयालु हमारे माता-पिता
जिस किसी पति को हमें सौंपेंगे प्रातः काल जल्दी उठेंगी, सोने वालों में अन्तिम
होंगी, स्वेच्छा से काम करने वाली होंगी, सभी वस्तुओं को मधुरता से व्यवस्थित
करेंगी तथा मधुर-भाषिणी होंगी। लड़कियो! स्वयं इस प्रकार अभ्यास करो।’’ 9. ‘‘और इस तरह से भी स्वयं अभ्यास करो, लड़कियो! हम उन सभी का आदर,
सम्मान, महत्त्व और मान करेंगी, जो हमारे पति के रिश्तेदार हों, चाहे माता या
पिता हों, साधु या दिव्य-पुरुष हों, और उनके आगमन पर उन्हें आसन और जल
देने वाली होंगी।’’
- ‘‘और इस तरह से भी स्वयं अभ्यास करो। लड़कियो! हम अपने पति का जो
काम होगा, उसमें दक्ष और कुशल होंगी, चाहे वह ऊन का हो या रुई का, उस
कार्य को समझना हम अपना लक्ष्य बनाएंगी, जिससे हम उस कार्य को कर सकें
और करवा सकें।’’
- ‘‘और इस तरह से भी स्वयं अभ्यास करो, लड़कियो! कारीगरों के प्रत्येक के
कार्य को हम जानेंगी कि क्या कार्य हो गया है और उनकी लापरवाहियों से क्या
कार्य नहीं हुआ है। हम रोगी की क्षमता और कमजोरियों को जानेंगी, हम उनके रोग
के अनुसार प्रत्येक के लिये गरिष्ठ और सुपाच्य भोजन को विभाजित करेंगी।’’ 12. ‘‘और इस तरह से भी स्वयं अभ्यास करो, लड़कियो! धन, धान, रजत और स्वर्ण
को जो हमारे पति घर लायेंगे, उसे हम सुरक्षित रखेंगी, उस पर निगाह रखेंगी और
उसकी रक्षा करेंगी, तथा इस प्रकार कार्य करेंगी कि कोई लुटेरा, चोर, उचक्का,
डाकू, उसे ले जा न सके।’’
- यह परामर्श सुनकर, उग्गह की लड़कियों ने बहुत खुशी अनुभव की और तथागत
के प्रति बड़ी कृतज्ञता दर्शायी।