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1. जादू-टोना द्वारा धर्मान्तरण का आरोप
- एक बार तथागत वैशाली के महावन की कुटागार शाला में निवास कर रहे थे।
उस समय लिच्छवीभद्दिय तथागत के पास आया और बोला, ‘‘भगवान! लोग
कहते हैं’ कि श्रमण गौतम एक जादूगर है और जादू-टोना खेल जानता है,
जिससे वह दूसरे मतों के अनुयायियों को प्रलोभित करता है।’’
- ‘‘जो ऐसा कहते हैं, वे तथागत का मिथ्या ढंग से पेश करते हैं। निस्सन्देह,
भगवान्! हम लिच्छवी इस आरोप पर विश्वास नहीं करते। किन्तु हम जानना
चाहेंगे कि इस विषय में तथागत का क्या कहना है।’’
- भगवान् ने कहा, ‘‘आओ, भद्दिय! सुनो, न तो सुनी-सुनाई बात को, न परंपरा
से चली आयी बात को, और न ही उस बात को स्वीकार करो कि लोग ऐसा
कहते हैं। न इसलिए स्वीकार करो, क्योंकि यह धर्मग्रन्थों में लिखी है या केवल
वह तर्कपूर्ण है, और न ही न्याय शास्त्र के आधार पर ही, न ही आभासों के
ध्यान से मान्य है, न ही इसलिये कि वह बात तुम्हारे दृष्टिकोण के अनुरूप है,
न ही इसलिये कि तुम सोचते हो यह बात ठीक है, और न ही इस विचार के
साथ कि, प्रत्येक को श्रमण का आदर करना चाहिये अर्थात् सम्मान के कारण
किसी बात को स्वीकार करना चाहिये।’’
- ‘‘किन्तु, भद्दिय! यदि सत्य के आधार पर तथ्यों के परीक्षण द्वारा स्वयं यह
जान लो कि किया गया कर्म पाप युक्त है या अकुशल कर्म या बुद्धिमान लोगों
द्वारा निन्दित किया गया कर्म और उसका परिणाम हानिकर है, तो भद्दिय! ऐसे
कर्मों का त्याग करो।’’
- ‘‘अब जहाँ तक तुम्हारे प्रश्न का सम्बन्ध है, भद्दिय! मैं तुमसे पूछता हूँ वे जो
मुझ पर जादू-टोना द्वारा धर्मान्तरण का आरोप लगाते हैं, क्या वे महत्वाकांक्षी
लोग नहीं हैं?’’ ‘‘हाँ, वे हैं भगवान्’’ भद्दिय ने उत्तर दिया।
- ‘‘तो भद्दिय! क्या एक आदमी महत्वाकांक्षी हो, लोभ के वशीभूत होकर और
लोभ से अभिभूत होकर, अपनी महत्वाकांक्षा को प्राप्त करने के लिये झूठ
नहीं बोलता या अपराध नहीं करता?’’ ‘‘ऐसा ही है, भगवन्’’ भद्दिय ने उत्तर
दिया।
- ‘‘तो भद्दिय! जब ऐसा आदमी जो महत्वाकांक्षी हो, और लोभ, द्वेष और बदले
की भावना से वशीभूत हो जाता है, वह दूसरे लोगों को उन लोगों के विरुद्ध