442 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
झूठे आरोप लगाने के लिये प्रेरित नहीं करता, जो उनकी महत्त्वकांक्षा के मार्ग
में आते हैं?’’ ‘‘ऐसा ही है, भगवान्,’’ भद्दिय ने कहा।
- ‘‘तो भद्दिय! मैं अपने शिष्य को इस प्रकार प्रेरित करने के लिये कहता हूँ,
‘आओ! मेरे प्रिय मानव, कृपणता एवं लोभ के विचारों को नियन्त्रित करते
हुए निवास करो। यदि तुम उस पर काबू रखते हो, तो मन, वचन या कर्म को
कृपणता व लोभ से उत्पन्न कार्यों को नहीं करोगे। द्वेष और मोह (अविद्या)
को नियन्त्रित करते हुए निवास करो।’’
- ‘‘अतः भद्दिय! जो श्रमण और ब्राह्मण, मुझ पर ऐसे झूठा आरोप लगाते हैं,
वे झूठे, मृषावादी हैं, जब आरोप लगाते हैं, कि श्रमण गौतम एक जादूगर है
और जादू-टोना का खेल जानता है, जिससे वह दूसरे सम्प्रदायों के अनुयायियों
का मत बदल देता है।’’
- ‘‘हे भगवान्! निस्सन्देह यह भाग्य की बात है, आप का जादू-टोना मंगलकारी
उचित खोज है। भगवान्! क्या ऐसा हो सकता है कि मेरे सभी प्रिय सगे-सम्बन्धी
इसी खेल द्वारा प्रलोभित हो जाएँ, तो निश्चय ही उनके हित और सुख के लिये
सहायक होगा। भगवान्! क्या ऐसा हो सकता है कि ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और
शूद्र वर्ण जादू के इसी खेल द्वारा उत्साहित हो जायें, तो निश्चय ही एक लम्बे
समय तक उनके हित और सुख के लिये सहायक होगा।’’
- ‘‘ऐसा ही है, भद्दिय! ऐसा ही है भद्दिय। यदि जादू के इस खेल द्वारा प्रलोभित
सभी वर्ण पापयुक्त परिस्थितियों का परित्याग कर दें, तो मेरा यह खेल संसार
के महान् हित और सुख के लिए होगा।’’
2. समाज पर व्यर्थ का भार होने का आरोप
- भगवान् बुद्ध पर यह भी आरोप लगाया गया था कि वह समाज पर भार स्वरूप
हैं और काम करके अपनी जीविका अर्जित नहीं करते थे। इस आरोप पर उनका
उत्तर नीचे दिया गया हैः
- एक बार भगवान! मगध जनपद के दक्षिण-गिरि प्रदेश में एकनाला नामक ब्राह्मण
गाँव में निवास कर रहे थे। उसी समय कसि भारद्वाज ब्राह्मण के पाँच सौ हल
बुआई के लिये जुते हुए थे।
- प्रातःकाल शीघ्र, चीवर धारण कर और हाथ में भिक्षा-पात्र लेकर तथागत वहां
गए, जहाँ ब्राह्मण काम में व्यस्त थे, ऐसे समय में जब भोजन लाया गया था
और वहाँ वे एक ओर खड़े हो गये।