456 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
गुरु-दक्षिणा खोजता है, वह कृषक, व्यापारी, ग्वाले, धनुर्धारी, राज कर्मचारी के
रूप में या किसी शिल्प द्वारा या भिक्षा पात्र की उपेक्षा न कर, केवल भिक्षाटन
द्वारा अपनी जीविका धम्म या अधम्म के अनुसार अर्जित करता है।’’ 38. ‘‘गुरु-दक्षिणा चुकाने के उपरान्त, वह धम्म या अधम्म के अनुसार एक पत्नी
खोजता है, एक खरीदी या बेची गयी, या एक ब्राह्मणी जिसके हाथों में जल
डाला गया है। वह एक ब्राह्मणी या किसी अन्य स्त्री के पास जाता है। बच्चे
वाली स्त्री, दूध पिलाने वाली स्त्री, इत्यादि के पास जाता है, और वह उसके
लिये भोग का एक साधन होती है या सन्तान उत्पत्ति का माध्यम होती है। वह
इन सब बातों को करते हुए जीवन व्यतीत करता है।’’
- ‘‘तब ब्राह्मण लोग उसके विषय में इस प्रकार कहते हैं, ‘यह कैसा है कि एक
आदरणीय ब्राह्मण इस प्रकार का जीवन व्यतीत करता है’?’’ 40. ‘‘तब उसके लिए वह उत्तर देता है, जिस प्रकार अग्नि स्वच्छ या मैली वस्तुओं
को जलाती है, किन्तु इससे अग्नि अशुद्ध नहीं होती, इसी प्रकार, भद्रजनो! यदि
एक ब्राह्मण इस प्रकार की सभी बातें करते हुए जीवन व्यतीत करता है, तो
उससे एक ब्राह्मण मलिन नहीं होता है।’’
- और यह कहा जाता है, ‘‘वह यह सभी बातें करते हुए जीवन व्यतीत करता
है, तो इसलिये वह एक अन्त्यज ब्राह्मण कहलाता है।’’
- ‘‘दोन! इस प्रकार एक ब्राह्मण अंत्यज ब्राह्मण बन जाता है।’’
- ‘‘वास्तव में दोन! वे प्राचीन ब्राह्मण, ऋषि, मन्त्र रचयिता, मन्त्र उच्चारक, जिनको
प्राचीन मन्त्र संग्रह का अक्षरशः शब्दशः ज्ञान है, उन्हीं का कहना है कि ब्राह्मण
पांच प्रकार के होते हैं, ब्रह्म-सदृश, देव-सदृश, बन्धन-युक्त, बन्धन-भंजक,
और अंत्यज ब्राह्मण।
‘‘दोन! इनमें से तुम कौन से ब्राह्मण हो?’’
‘‘श्रमण गौतम! यदि ऐसा है, तो हम अन्त्यज ब्रा“मण की भी शर्तें पूरी नहीं
करते?’’
- ‘‘किन्तु श्रमण गौतम! यह अद्भुत है, जो आपने कहा, जब तक मेरी जिन्दगी
रहती है, मुझे श्रमण गौतम एक उपासक के रूप में अपनी शरण में ले लें।’’