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- ‘‘और दोन! एक ब्राह्मण बन्धनयुक्त ब्रा“मण कैसे बनता है?’’
- ‘‘दोन! एक ब्राह्मण का उदाहरण लो, जो समान जन्म और आचरण वाला हो...
जो उसी प्रकार विवाह करता है।’’
- ‘‘और जब विवाहित अवस्था में उसने एक बच्चे को उत्पन्न कर लिया हो,
बच्चे के प्रति स्नेह उसे अभिभूत कर लेता है और वह पारिवारिक सम्पत्ति में
ही बस जाता है, और गृह-त्याग कर अनागरिक नहीं होता।’’ 29. ‘‘प्राचीन ब्राह्मणों के बन्धनों में वह ठहर जाता है, उनका उल्लंघन नहीं करता,
और यह कहा जाता है, वह बन्धनों के भीतर ही रहता है, उल्लंघन नहीं करता
और इसलिये ब्राह्मण बन्धनयुक्त ब्राह्मण कहलाता है।’’
‘‘इस प्रकार, दोन, ब्राह्मण बन्धनयुक्त बनता है।’’
‘‘और दोन! एक ब्राह्मण बन्धन-भंजक कैसे बनता है?’’
‘‘दोन! एक ब्राह्मण का उदाहरण लो, जो समान जन्म और आचरण वाला है।....
वह गुरु-दक्षिणा चुकाता है और या तो धम्म अनुसार या अधम्म अनुसार एक
पत्नी खोज लेता है। एक खरीदी हुई या बेची हुई या वह ब्राह्मणी जिसके ऊपर
जलाभिषिक्त रीति हो चुकी हो।’’
- ‘‘वह एक ब्राह्मणी या एक कुलीन या एक निम्न जाति की स्त्री या एक दास
स्त्री के पास जाता है। एक अन्त्यज या एक शिकारी या एक बाँस के कारीगर
या एक रथ-कार या एक आदिवासी की पुत्री के पास जाता है_ वह एक बच्चे
वाली स्त्री, एक दूध पिलाने वाली स्त्री, जो ऋतुनी है, जो ऋतुनी नहीं है,
उनके पास भी जाता है, और उसके लिये ब्राह्मणी केवल भोग का, मनोरंजन
का और आनन्द का या सन्तान उत्पन्न करने का साधन बन जाती है।’’ 34. ‘‘वह प्राचीन बन्धनों के भीतर ही नहीं ठहरता, बल्कि उनका उल्लंघन भी
करता है, और ऐसा कहा जाता है कि वह बन्धनों के भीतर नहीं ठहरता,
बल्कि उल्लंघन करता है, और इसलिये वह एक बन्धन-भंजक ब्राह्मण कहलाता
है।’’
- ‘‘इस प्रकार दोन! एक ब्राह्मण बन्धन-भंजक ब्राह्मण बन जाता है।’’
- ‘‘और दोन! एक ब्राह्मण एक अन्त्यज ब्राह्मण कैसे होता है?’’
- ‘‘दोन! एक ब्राह्मण का उदाहरण तो, जो समान जन्म वाला हो, वह अड़तालीस
वर्षों तक ब्रह्मचर्य जीवन का पालन करता है, अपने को वह वेद-मन्त्रों में
ज्ञाता बनता है, तब विद्याध्ययन समाप्त करने के उपरान्त, वह शिक्षण के लिये