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रुचिकर है। वहां तथागत पानी पी लें और हाथ-मुंह धोकर शरीर के अंगों को
भी ठंडा कर सकते हैं। इस जलाशय का जल अस्वच्छ और गन्दा है।’’ 7. उस समय तथागत इतने दुर्बल हो गए थे कि नदी तक भी चलकर नहीं जा
सकते थे। उन्होंने समीप के जलाशय का ही जल लेने को प्राथमिकता दी। 8. आनन्द जल ले आये और तथागत ने उसे पी लिया।
- कुछ समय विश्राम करने के पश्चात् तथागत भिक्षु-संघ के साथ ककुत्थ नदी
की ओर गये और जब वे वहां आ गये, वे नीचे जल में उतरे, नहाया और जल
पिया और पुनः दूसरी ओर बाहर निकलकर वे आम्रवन की ओर बढ़ गये। 10. जब वे वहाँ पहुंचे, उन्होंने पुनः चीवर बिछाने के लिये आनन्द से कहा, ‘‘मैं
का हुआ हूँ और लेटूँगा।’’ आज्ञानुसार चीवर बिछा दिया गया और तथागत ने
उसके ऊपर लेट कर विश्राम किया।
- कुछ समय विश्राम करने के पश्चात् तथागत उठ गये और आनन्द से कहा,
‘‘आओ, आनन्द! हम मल्लों के सालवन में चलें, जो हिरण्यवती नदी के दूसरे
किनारे पर कुसिनारा का उपवन है।’’
- उस स्थल पर पहुंचने के उपरान्त, तथागत ने पुनः आनन्द से अपना चीवर
जुड़वा साल वृक्षों के मध्य बिछा देने को कहा, ‘‘मैं थका हुआ हूँ और विश्राम
करूंगा।’’
- आनन्द ने चीवर बिछा दिया और तथागत अपने आप उस पर लेट गये।