508 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
- तब तथागत मुख्य सड़क से हटकर एक ओर मुड़ गये और एक वृक्ष की छाया
में गये और वहाँ उनके लिये तैयार सुसज्जित आसन पर बैठ गये। और इसित्त
और पूर्ण राज्याधिकारी तथागत को नमन कर एक ओर बैठ गये। जब वे इस
प्रकार बैठ गये, उन्होंने तथागत से यह कहाः
- ‘‘तथागत! जब हमने तथागत के विषय में सुना कि वे कौशल जनपद में अपनी
चारिका करेंगे, उस समय हम इस विचार से हतोत्साहित और उदास हो गये थे
कि तथागत हमसे दूर हो जाएंगे।’’
- ‘‘जब, तथागत हमने सुना कि भगवान् कौशल जनपद में अपनी चारिका के
लिये श्रावस्ती से निकल रहे हैं। पुनः इस विचार से हम हतोत्साहित और उदास
हो गये कि तथागत हम से दूर हो जाएंगे।
- ‘‘पुनः भगवान्! जब हमने सुना कि तथागत कौशल जनपद को छोड़ कर मल्ल
जनपद में चारिका के लिये जाएंगे.... कि वे वास्तव में ऐसा कर रहे हैं..... हम
हतोत्साहित और उदास हो गये थे।’’
- ‘‘भगवान्! यह सुनकर कि तथागत मल्ल जनपद को छोड़ कर वज्जी जनपद
चारिका के लिए जायंगे... कि वे वास्तव में ऐसा कर रहे हैं... कि काशी जाने
के लिए वज्जी जनपद छोड़ेंगे.... कि वे वास्तव में ऐसा कर रहे हैं.... पुनः
हम हतोत्साहित और उदास हो गये थे।’’
- ‘‘किन्तु, भगवान्! जब हमने सुना कि तथागत काशी जनपद के लिये मगध
जनपद को छोड़ देंगे और ऐसा कर रहे हैं, तब हम इस विचार से आनंदित,
प्रसन्न और प्रफुल्लित हो गए कि तथागत हमारे से समीप ही रहेंगे।’’ 13. ‘‘जब हमने सुना कि भगवान् वास्तव में मगध जनपद से काशी में अपनी
चारिका के लिये जा रहे हैं, हम उसी प्रकार आनन्दित और प्रफुलिल्त हो गये
थे।’’
- उन्होंने तथागत के काशी जनपद से वज्जी जनपद, बज्जी जनपद से मल्ल जनपद,
मल्ल जनपद से कोसल जनपद में जाने का इसी प्रकार वर्णन करते रहे। 15. ‘‘किन्तु भगवान्! जब हमने सुना कि तथागत अपनी चारिका के लिये कौशल
जनपद से श्रावस्ती जा रहे हैं, हम इस विचार से आनन्दित और प्रफुल्लित हो
गये थे, अब तथागत हमारे बहुत समीप ही रहेंगे!
- ‘‘तब, जब हमने सुना, ‘तथागत श्रावस्ती के जेतवन के अनाथ पिण्डिकाराम में
ठहरे हुए हैं। तब भगवान, इस विचार से हमारा आनन्द और उल्लास असीम
था कि तथागत हमारे समीप हैं।’’