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- ‘‘आओ हम सब एक जुट होकर, मैत्रीपूर्ण, भावना से आठ भाग कर लें। प्रत्येक
जनपद में पर उन पर विशाल स्तूप बनाये जायें, जिससे कि सभी स्थानों तथागत
को श्रंद्धाजलि दी जा सके।’’
- कुसीनारा के मल्ल सहमत हो गये और बोले, ‘‘हे ब्राह्मण! तब तुम ही, उचित
बंँटवारे द्वारा अस्थि-अवशेषों को समान आठ भागों में विभक्त कर दो।’’ 12. ‘‘बहुत अच्छा! कह कर’’ द्रोण ने सहमति दे दी।
- और उसने तथागत के अस्थि-अवशेषों को समान आठ भागों में विभक्त कर
दिया।
- विभाजन करने के पश्चात् द्रोण ने उनसे कहा, ‘‘मुझे यह पात्र मिल जाए। मैं
इसके ऊपर एक स्तूप बनवाऊँगा।’’
और वे सब उसे पात्र देने को सहमत हो गये।
इस प्रकार तथागत के अस्थि-अवशेषों का बँटवारा हो गया और विवाद शान्ति
और सौहार्द ढंग से निपट गया।
8. बुद्ध के प्रति श्रद्धार्पण
श्रावस्ती में घटी घटनाएं....
उस समय कुछ भिक्षु यह सोच कर तथागत के लिये एक चीवर तैयार हो
जाएगा बनाने में व्यस्त थे क्योंकि तीन महीने के बाद तथागत अपनी चारिका
के लिये जायेंगे।
- उसी समय इसिदत्त तथा पूर्ण नामक दो राज्याधिकारी किसी कार्य से साधुका
में ठहरे हुए थे। तब उन्होंने समाचार सुना- ‘वे कहते हैं कि कुछ भिक्षु यह
सोचकर तथागत के लिये एक चीवर बनाने में व्यस्त हैं कि तीन महीने के बाद
जब चीवर बन जायेगा, तथागत अपनी चारिका के लिये जायेंगे। 4. अतः इसिदत्त और पूर्ण राज्याधिकारियों ने एक आदमी को इस प्रकार निर्देश
देकर राजपथ पर नियुक्त कर दिया- ‘‘ज्यों ही तुम उन भगवान् तथागत, अर्हत,
सम्यक् सम्बुद्ध को आते हुए देखो, तुम तुरन्त आकर हमें सूचित करना।’’ 5. अतः वहाँ दो या तीन दिन खड़े रहने के पश्चात् उस मनुष्य ने तथागत को
आते हुए देखा, यद्यपि वे अभी कुछ दूरी पर ही थे, और वह यह कहते हुए
इसिदत्त और पूर्ण राज्याधिकारियों को सूचित करने गया, ‘‘भगवन् तथागत,
अर्हत, सम्यक सम्बुद्ध आ रहे हैं, जो आप करना चाहते हैं, वह करें।’’ 6. अतः इसिदत्त और पूर्ण राज्याधिकारी तथागत की ओर गये, और उनके समीप पहुँच
कर, उनका अभिवादन किया। तथागत का कदम-दर-कदम अनुसरण किया।