3. उनके नेतृत्व की सामर्थ्य - Page 543

514 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

  1. अतः वे शान्त हो गये और तथागत आ पहुँचे। सकुलदायी ने कहा ‘‘आपसे

हमारे साथ बैठने के लिये निवेदन है। आपका सच्चे हृदय से स्वागत है, बहुत

समय से आपका इधर आगमन नहीं हुआ। कृपया! आसन ग्रहण करें। भगवान्!

आपके लिये आसन सुसज्जित है।’’

  1. तथागत ने तदनुसार आसन ग्रहण कर लिया और सकुलदायी ने पूछा, ‘‘उनका

विषय क्या था और किस बात पर चर्चा हो रही थी, जो बाधित हो गयी।’’ 10. सकुलदायी ने उत्तर दिया, ‘‘उसे इस समय भूल जायें। आप सरलता से बाद में

उसे जान सकते हैं।’’

  1. कुछ दिनों पहले ही, जब दूसरे नाना मतों के श्रमण और ब्राह्मण सभागार में

इकट्ठे हुए थे, यह चर्चा प्रारम्भ हो गयी थी, कि अंग में मगध लोगों के

लिये कितनी अच्छी बात है, कितनी अधिक अच्छी बात है कि ऐसे श्रमण

और ब्राह्मण जो सभी गणाचार्य हैं, सभी सुविख्यात व प्रसिद्ध आचार्य हैं, सभी

उद्धारक मतों के संस्थापक हैं, अनेक लोगों द्वारा उच्च आदरणीय हैं, वे सभी

राजगृह में वर्षावास व्यतीत करने आये हैं।

  1. ‘‘उनमें पूर्ण काश्यप, मक्खली जो अजित केशकम्बल, पकुध कच्यायन, संजय

बेलट्ठिपुत्त और निगण्ठनातपुत्त हैं, सभी विशिष्ठ और सभी यहाँ वर्षावास के लिये

आये हैं और उनके मध्य श्रमण गौतम भी यहाँ है, जो भिक्षु-संघ और उपासकों

के नायक हैं, एक सुविख्यात और प्रसिद्ध शास्ता हैं, एक उद्धारक व धम्म के

संस्थापक हैं, जो अनेक लोगों के श्रद्धाभाजन हैं।’’ ‘‘अब इनमें से कौन सा

विशिष्ट पुरुष है, जो सुविख्यात आचार्य श्रमणों और ब्राह्मणों में अपने शिष्यों द्व

ारा सम्मानित, आदर प्राप्त करने वाला, सत्कार प्राप्त करने वाला और पूजा जाता

है? और सम्मान और आदर की किन शर्तों के साथ वे उसके साथ रहते हैं।’’ 14. कुछ ने कहाः ‘‘पूर्ण काश्यप कोई सम्मान या आदर नहीं पाते, अपने शिष्यों

से कोई सत्कार या श्रद्धा उन्हें नहीं मिलती, वे सम्मान और आदर की शर्तों के

बिना उनके साथ रहते हैं।’’

  1. ऐसा भी समय था, जब वे अपना सिद्धान्त अपने कुछ सौ अनुयायियों को

उपदेशित कर रहे थे, तब एक शिष्य बीच में ही बोल उठा ‘‘पूर्ण काश्यप से

प्रश्न मत करो, जो इस विषय में कुछ नहीं जानते। मुझसे पूछो मैं जानता हूँ,

मैं प्रत्येक बात आप लोगों को स्पष्ट कर दूंगा।’’

  1. तब पूर्ण काश्यप ने आंखों से आंसू भर और बाहें फैला कर, यह कहा ‘‘शान्त

रहो, शोर मत करो।’’