1. महाकारुणिक की करुणा - Page 545

516 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

1. महाकारुणिक की करुणा

  1. जब एक बार तथागत श्रावस्ती में ठहरे हुए थे, कुछ भिक्षुओं ने आकर उन्हें

सूचित किया कि वे देवों द्वारा निरन्तर परेशान किये जाते हैं, जो उनकी समाधि

में विघ्न डाला करते हैं।

  1. उनकी परेशानी सुनने के पश्चात् तथागत ने उन्हें निम्नलिखित उपदेश दिये-
  2. ‘‘वह जो परमार्थ के विषय में कुशल व में निपुण है, जो उस शान्ति-पद को

प्राप्त करने का इच्छुक है, उसे इस प्रकार कार्य करना चाहिये, समर्थ होना चाहिए

उसे ईमानदार होना चाहिए, उसे सुवच, मृदु तथा विनम्र होना चाहिये।’’ 4. ‘‘उसे संतुष्ट, सरलता से भरण-पोषण हो सकने वाला, सीमित कर्त्तव्यों वाला,

हल्की जीविका वाला, संयतेन्द्रिय, विवेकी, उद्धृत नहीं होना चाहिये तथा गृहस्थों

में आसक्त नहीं होना चाहिये।’’

  1. ‘‘उसे कोई भी ऐसी छोटी से छोटी बात नहीं करनी चाहिये, जिससे कि अन्य

विज्ञजन उसकी निन्दा कर सकें। उसकी यही इच्छा होनी चाहिये कि ‘सभी

प्राणियों का मंगल हो’ ‘सभी प्राणी सुखी और सकुशल हों और उनके हृदय

कल्याणकारी हो।’’

  1. ‘‘जो कोई भी सजीव प्राणी हो, चाहे दुर्बल हों या सबल, चाहे लम्बे हो या

छोटे, मोटे हो या पतले लघु या विशाल कोई भी हो, सबका कल्याण हो।’’ 7. ‘‘चाहे देखे गये हों या अनदेखे, चाहे वे जो दूर रहते हैं या समीप, चाहे वे जो

जन्में हैं, या जो अभी पैदा होंगे, सभी प्राणी सुखी रहें।’’

  1. ‘‘कोई एक दूसरे को धेखा न दे, और न किसी से घृणा करे, जो भी किसी

स्थान पर हो, उसे वे क्रोध या द्वेष के वशीभूत हो किसी अन्य को कोई हानि

पहुँचाने की इच्छा न करें।’’

  1. ‘‘जिस प्रकार एक माँ अपनी जान को जोखिम में डालकर भी अपने इकलौते

बच्चे की रक्षा करती है, उसी प्रकार उसमें वही असीम हृदय सभी प्राणियों के

लिये होना चाहिए।’’

  1. ‘‘उसे ऊपर, नीचे और चारों दिशाओं में बिना किसी अवरोध के, बिना किसी

द्वेष के समस्त संसार में असीम प्रेम की भावना का संचार करना चाहिए।’’ 11. ‘‘भले ही वह खड़ा हो, चलता हो, बैठा हो, लेटा हो, जब तक वह जागृत

अवस्था में है, उसे अपनी सतत जागरूकता विकसित करनी चाहिये, इसी को

श्रेष्ठ जीवन कहते हैं।’’