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540 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

  1. अपने में समेटे हुए आपकी सम्यक् मार्ग-गामिनी करुणा और मैत्री सभी भौतिक

वस्तुओं से श्रेष्ठतर उस राशि का परिणाम है, जिसे आपने अनन्त जन्मों में

संचित किया है।

  1. आपकी ज्योति सूर्य और चन्द्रमा रूपी दर्पणों के समान सर्वत्र व्याप्त है।
  2. मेरी प्रार्थना है कि सभी प्राणी, जो वहाँ सुखावति-लोक में जन्म ग्रहण करें, वे

सभी तथागत के समान ही सद्धर्म की घोषणा करें।

  1. यहाँ मैं यह निबन्ध लिख रहा हूँ और इन पुण्य श्लोकों का उच्चारण कर रहा

हूँ, मैं प्रार्थना करता हूँ, हे भगवान् बुद्ध! मुझे आपका साक्षात् दर्शन हो सके। 8. और मैं समस्त प्राणियों के साथ सुखावति-लोक में जन्म ग्रहण कर सकूं।

---समाप्त---