58 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
- ‘‘यह विरोध केवल राजाओं और देशों के बीच नहीं है, बल्कि कुलीनों और
ब्राह्मणों के बीच, गृहस्थों के बीच, मां और पुत्र के बीच, पिता और पुत्र के
बीच, भाई और बहन के बीच और साथी-साथी के बीच है।’’
- ‘‘देशों के बीच संघर्ष कभी-कभी होता है। लेकिन वर्गों के बीच संघर्ष हमेशा
और लगातार होता है। यही संसार के सभी दुःखों और कष्टों का मूल कारण
है।’’
- ‘‘यह सही है कि मैंने युद्ध के कारण गृहत्याग किया था। फिर भी कोलियों
और शाक्यों के बीच युद्ध समाप्त हो जाने पर भी मैं घर में वापस नहीं लौट
सकता। मैं देखता हूँ कि मेरी समस्या ने व्यापक रूप धारण कर लिया है। मुझे
सामाजिक संघर्ष की समस्या का समाधान खोजना है।’’
‘‘पुराने परम्परागत दर्शनों के पास इस समस्या का समाधान किस प्रकार है?’’
‘‘क्या वह किसी एक सामाजिक दर्शन को स्वीकार कर सकता है?’’
उसने प्रत्येक परम्परा का और प्रेत्येक मत का स्वयं परीक्षण करने का निश्चय
किया।