68 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
- न्यग्रोध वृक्ष के नीचे गौतम को बैठा देखकर पुण्णा ने सोचा कि आज वृक्ष
देवता ही नीचे उतर आए हैं।
- सुजाता स्वयं आई और अपने द्वारा तैयार की गई खीर स्वर्ण-पात्र में गौतम को
अर्पित की।
- वह पात्र को नदी तट पर ले गया और सुपतिट्ठ नामक घाट पर स्नान किया
और फिर भोजन किया।
इस प्रकार उसकी तपश्चर्या का परीक्षण समाप्त हुआ।
तपस्या और आत्म-संताप का जीवन छोड़ने के कारण गौतम के साथ वाले
पाँचों संन्यासी उससे रुष्ट हो गए और घृणावश उसे छोड़ गए।