अध्याय-3 : ब्रिटिश सरकार से पूर्व का भारत - Page 68

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तक माल की ढुलाई करने के लिए भारत में बने जहाजों का प्रयोग किया जाता था। इस प्रकार ढोया जाने वाला माल ग्रेट ब्रिटेन के कुल टनभार की तुलना में नगण्य नहीं था। (4) भारत पर कब्जा होने से समाज के एक अधिसंख्य वर्ग के लिए व्यवस्था करना आसान हो गया है जिसके लिए अन्य सभी देशों में तथा अपने देश में उचित व्यवस्था करना कठिन है। इसलिए, भारत की सेवा ही एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें अधिकांश लोगों को रखा जा सकता है और जिससे उनको तथा उनके देश को लाभ हो सकता है।

भारत ने इंग्लैंड की खुशहाली में इन तरीकों से योगदान करने के अलावा कई अन्य तरीकों से भी योगदान दिया। इन अप्रत्यक्ष तरीकों से लाभ होने के बावजूद इंग्लैंड ने भारत को नुकसान पहुँचाने के लिए कई प्रत्यक्ष और कठोर उपाय किये। भारत को नुकसान पहुँचाने के लिए इंग्लैंड ने सुरक्षा प्रणाली अपनाई। इंग्लैंड किसी भी तरह भारत में बनी वस्तुओं से प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकता था। निर्माता के रूप में भारत इंग्लैंड से आगे था। परिवहन लागत के बावजूद इंग्लैंड के बाजारों में वहाँ के माल का स्थान भारतीय माल ने ले लिया था। भारत में बनी वस्तुओं की इस प्रतिस्पर्धा को नष्ट करने के लिए इंग्लैंड ने कठोर संरक्षणात्मक नीति अपनाई। निम्नलिखित आँकड़ों से स्पष्ट हो जाएगा कि भारत में बनी वस्तुओं पर काफी अधिक शुल्क लगाए जाते थेµ

...एलोई रेचक दवा पी सी 280

...सा फोइफिदा 622

...जामिन 373

...रेक्स 102

इलायची 266

क्लोव (लोंग) 240

तेजपत्ता 140

कोक..स 400

कॉफी 373

क्यूबेक चीनी 320

ड्रेगन ब्लड (ताल रक्त) 465

गैम...... (गोंद) 187

एन एम नियाक 466

माइरफ 187

नक्स .... 266

आयल .... कसिया (तेजपत्ता का तेल) 343

दालचीनी का तेल 400

जावित्री 3000