126 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
पर्याप्त नहीं है, जब तक कि वह प्रतिपूर्ति करने की प्रतिज्ञा के समान नहीं
है।
मोचन का अधिकार एवं पट्टठ्ठे के नवीनीकरण का फायदा -
धारा 64
पट्टठ्ठे का नवीनीकरण, बंधककर्त्ता के मूल हित के अंगीकरण का एक प्रकार है।
- यदि बंधकी पट्टठ्ठे का नवीनीकरण प्राप्त करता है तो बंधककर्त्ता नवीकृत पट्टठ्ठे
के मोचन पर फायदा लेने का हकदार है।
- यह प्रतिकूल संविदा के अधीन है।
बंधककर्त्ता का व्यवस्था करने का अधिकार
धारा 66
- जब तक बंधककर्त्ता कब्जाधारी है तब तक वह बिना हिसाब-किताब के
किराया एवं लाभों को प्राप्त करने के संपत्ति के साधारण अधिकारों का प्रयोग
करने के लिए स्वतंत्र है।
प्रश्न है कि क्या बंधककर्त्ता क्षय के लिए दायी है?
यह एक धारा है जो क्षय की नीति के बारे में है। क्षय या तो स्वैच्छिक है
या अनुमत है। स्वैच्छिक क्षय में कुछ कार्य जो परिसर को ध्वंस की ओर ले
जाता है के किए जाने को विवक्षित हैं, जैसे मकान को गिराने या जोड़ों को
हटाकर या उनकी प्रकृति में परिवर्तन करके, जैसे चरागाह को कृषि योग्य
में परिवर्तन या इमारतों को ढहा कर।
अनुमत क्षय में लोप विवक्षित है जिसके द्वारा परिसरों की क्षति होती है, उदाहरण के लिए मकान गिरकर ध्वस्त हो जाते हैं।
परिसरों के ध्वंस से स्वैच्छिक क्षय गठित करने के लिए ध्वंस निश्चित रूप से पूर्व विमर्शित या उपेक्षापूर्ण होना चाहिए, वह क्षय नहीं है, यदि परिसर उचित प्रयोग के दौरान ध्वस्त हो जाता है और कोई भी प्रयोग उचित है यदि वह संपत्ति को प्रकृति एवं जैसे किराएदार उसके बारे में जानता है को ध्यान में रखते हैं, के प्रयोग का ढंग एवं सीमा प्रकटतः उचित है।
- धारा 66 के अनुसार बंधककर्त्ता अनुमत क्षय के लिए उत्तरदायी नहीं है। यह
केवल स्वैच्छिक क्षय के लिए उत्तरदायी है जो प्रतिभूति को अपर्याप्त बनाता
है।
- प्रतिभूति अपर्याप्त है यदि मूल्य देय धन के 1/3 से कम है और यदि प्रतिभूति
इमारतें हैं तो 1/2 से कम है।
धारा 65 A के लिए पृ. 523 देखें।