भाग -3 प्रमाण का भार - Page 179

162 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

से प्रेरित होती हैं।

  1. यह समरूपता दिए जाने पर यह कहना संभव है कि एक बात के दिए जाने पर

दूसरे का अनुसरण करना कहा जा सकता है।

  1. इसी सिद्धांत पर धारा 114 आधारित है।

(1) यह न्यायालय को एक तथ्य के अस्तित्व का अनुमान करने की शक्ति देता

है यदि वह तथ्य एक विशेष तथ्य का एक संभाव्य परिणाम है।

(2) परीक्षण हैः-

(i) स्वाभाविक घटनाओं का सामान्य गतिक्रम।

(ii) मानवीय आचरण।

(iii) सार्वजनिक एवं निजी व्यापार।

(3) यह कुछ तथ्यों के जो संभाव्य परिणाम होंगे, उनके नौ दृष्टांत देता है।

(4) स्पष्टीकरण-दृष्टांत (पांडुलिपि में नहीं दिए गए - संपादक)

(5) एक परिस्थिति में संभाव्य एक घटना एक दूसरी परिस्थिति में ठीक

असंभाव्यता हो सकती है अतः न्यायालय को एक धारणा बनाने में उस विशेष

मामले के तथ्यों का अवश्य ध्यान रखना चाहिए।

दृष्टांतों का स्पष्टीकरण (पांडुलिपि में नहीं दिया गया - संपादक)

(6) अनुमानों (धारणाओं) का सामान्य वर्गीकरण नहीं हो सकता, क्योंकि संभाव्य

परिणाम परिस्थितिवश भिन्न होने चाहिए।

(7) अनुमान का प्रभाव व्यक्ति को प्रमाण के भार से मुक्त करता है।

(8) विधिक अनुमान और तथ्य के अनुमान।

(9) खंडनीय और दंडनीय अनुमान।

नॉर्शन पृ. 381

II. सदृश अनुमान विधियों के सूत्र हैं। वे शब्द के लचीले रूप में अनुमान कहे जाते हैं।

  1. कुछ विधि के जो अनुमापन भी कहे जाते हैं।

  2. विधि-सूत्रों के दृष्टांत

(1) विधि धारणा करेगी कि प्रत्येक व्यक्ति विधि को जानता है।

(2) विधि धारणा करेगी कि प्रत्येक व्यक्ति अपने कार्यों के स्वाभाविक परिणामों

पर विचार करता है।