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(ii) कनिंघम कहते हैं कि यह होता है।
30 बम्बई एल.आर. 646
धारा 58 दंड-अन्वीक्षण कार्यवाहियों के संबंध में अपवाद नहीं है।
39 मद्रास 449, रेट यू.एन.सी.आर.सी 769
न्यायशास्त्र के सामान्य सिद्धांतों पर धारा 58 दंड अन्वीक्षणों के लिए प्रयुक्त नहीं होनी चाहिए।
फ्प्रश्न है कि क्या अधिनियम के प्रावधान सर्वांग पूर्ण हैं या हम न्यायशास्त्र के सिद्धांत या आंग्ल-विधि के अधिनियम में दिए गए साक्ष्य के नियमों के पूरकों और व्याख्यायियों का आह्वान कर सकते हैं।य् 12 इलाहाबाद 1. साक्ष्य के आंगल नियम प्रयुक्त होते हैं।
यह नियम एक पूर्ण नियम नहीं है। धारा प्रावधान करती है कि एक तथ्य जो स्वीकृत है, उस पक्ष के द्वारा जिस पर प्रमाण का भार है। प्रमाणित किए जाने की जज द्वारा अपेक्षा की जा सकती है।
सीधे-सादे एवं अनभिज्ञ व्यक्ति के प्रति गलतियों से रक्षा करने के लिए यह साधारण संरक्षण है।
यह संभवतः इस प्रतिबंध के अधीन है कि दंड-अन्वीक्षणों में स्वीकरण अनुमत नहीं किए जाते हैं।
तथ्य जिनका अस्तित्व विधि के द्वारा अनुमानित किया जाता है।
- अनुमान की परिभाषा
एक अनुमान एक निश्चित तथ्य से लिया गया एक निष्कर्ष या अनुमति है।
- अनुमान के नियम के अधीन सिद्धांतः
(1) निःसंदेह विश्व विविध तत्त्वों की रचना है और प्रेरक जो लोगों में संक्रिय हैं,
अलग है।
फिर भी इसमें निश्चित मात्रा में विनियमितता और एकरूपता है।
(2) वस्तुओं के संबंध में ऋतुओं सूर्यास्त, सूर्योदय एवं आकाशीय नक्षत्रों के संचरण
क्रम और परिवर्तनों में, और मौलिक तत्त्व चुम्बकत्व विशिष्ट गुरुत्वाकर्षण के
ज्ञात गुण धर्मों में एक नियमितता और समरूपता दर्शाते हैं।
(3) व्यक्तियों के संबंध में स्वाभाविक गुण, शक्तियां संकाय जो सामान्य मानवीय
वंश में घटनाएं हैं, अधिकांशतः समरूप हैं।
(4) मनुष्य के आचरण के संबंध में अधिकांशतः समरूपता है। वे उसी समरूपता