भाग -3 प्रमाण का भार - Page 181

164 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

  1. विषय जिनका दावा करना पक्षों के लिए विवर्जित है। (निश्चायक साक्ष्य)

  2. जिन विषयों को प्रमाणित करने से पक्षों को रोक दिया गया है। (विबन्धन)

  3. बिना द्वेष के व्यक्त विषय।

  4. विषय जो असंगत हैं।

विषय जिनका दावा करने से पक्ष विवर्जित किए जाते हैंः-

विषय जिनको निश्चयपूर्वक कहने से पक्ष विवर्जित किए जाते हैं, साक्ष्य अधिनियम में निर्णायक प्रमाण के रूप में या साधारणतः कहे जाने वाले अखण्डनीय अनुमान या विधिक अनुमान के रूप में अभिव्यक्त किए जाते हैं। वे धारा 41, 112 एवं 113 में व्यवहार में आते हैं।

(II) धारा 112

यह धारा इस प्रश्न से संबंधित हैः

कैसे प्रमाणित किया जाए कि अ, वैध बच्चा है, ब और उसकी पत्नी स का?

  1. इस तथ्य को प्रमाणित करने के लिए दो भिन्न संभावनाओं के अनुसार दो तरीके हैं।

(i) यदि संभावना यह है कि बच्चा विवाह की कालावधि में जन्मा हैः

(अ) ब और स की विधिपूर्वक शादी प्रमाणित कीजिए।

(ब) अ के जन्म-दिन पर ब और स के बीच वैवाहिक संबंधों की विद्यमानता

को सिद्ध कीजिए।

इन दो तथ्यों के आधार पर विधि-निश्चय करेगी कि अ, ब और स का वैध बच्चा है।

(ii) यदि संभावना है कि बच्चे का जन्म ब एवं स के वैवाहिक विघटन यथा या तो पिता की मृत्यु या तलाक के बाद हुआ है।

(अ) प्रमाणित कीजिए कि अ का जन्म वैवाहिक विघटन-मृत्यु या तलाक से

280 दिनों के अंतर्गत हुआ है।

(ब) सिद्ध कीजिए कि मां 280 दिनों की कालावधि में अविवाहित रही थी।

इन दो तथ्यों के प्रमाण पर विधि निश्चय करेगी कि अ, ब और स का वैध बच्चा है।

ध्यान दिए जाने वाले बिन्दु -

  1. वैधता के प्रश्न में निर्णायक तत्त्व, बच्चे का गर्भाधान काल नहीं बल्कि बच्चे के जन्म का समय है। बच्चे के जन्म के समय पर जो कोई भी उस महिला का पति था, पिता है।