165
दृष्टांत
1. पालसिंह बनाम जागीर 7 लाहौर 368
हरनाम कौर ने हरीसिंह से विवाह किया। हरीसिंह 10 जनवरी, 1919 को मर गया। हरनाम कौर ने सोहन सिंह से 25 फरवरी, 1919 को विवाह किया। जागीर हरनाम कौर से 17 अक्टूबर 1919 अर्थात् हरीसिंह की मृत्यु के 279 दिन बाद और मोहन सिंह के विवाह के 198 दिन बाद जन्मा।
इस प्रश्न के उत्पन्न होने पर क्या जागीर, हरीसिंह का पुत्र था, निर्णीत हुआ कि वह सोहन सिंह का पुत्र था और न कि हरीसिंह का।
2. पालानी बनाम सेतु 49 मद्रास 553
पेची अम्मल ने अक्टूबर 1903 में सुब्रमन्य से विवाह किया। वह विवाह जून 1904 में विच्छेदित हो गया।
पेची ने जुलाई 1904 में तिरूमणि से विवाह किया।
पालानी सितम्बर 1904 के द्वितीय सप्ताह में जन्मा अर्थात् सुब्रमन्य के साथ पेची के विवाह के विच्छेदन के 4 माह बाद और तिरूमणि से उसके विवाह के 3 माह बाद।
पालानी किसका पुत्र है? सुब्रमन्य या तिरूमणि का।
निर्णय हुआ वह तिरूमणि का पुत्र था।
- यह निर्णायक प्रमाण का विषय माना जाता है। यह इसलिए माना जाता है, इस कारण नहीं कि सत्य विवाद से परे हैं। यद्यपि एक महिला एक पुरुष के साथ विधिपूर्वक विवाहित होने पर भी एक अन्य व्यक्ति की देख-भाल में हो सकती है और उसके बच्चे ठीक उसके प्रेमी से हो सकते हैं। यह ऐसा माना जाता है क्योंकि लोक नीति के कारण या समाज के हित में कुछ तथ्यों की विधि में एक कृत्रिम प्रमाणक मूल्य दिया जाता है, और उस तथ्य से द्वंद्व करने के दृष्टिकोण से कोई साक्ष्य प्रस्तुत किए जाने को अनुमत नहीं किया जाता है। धारा 112 के अंतर्गत निम्नलिखित तथ्यों की प्रमाणक गुणवत्ता है।
(1) विवाह का तथ्य।
(2) आगमन का तथ्य।
ताकि जहां ये दो तथ्य विद्यमान हों विधि का निष्कर्ष है कि जन्म-जात बच्च निश्चित रूप से वैध है अर्थात् यह पति से जन्मा होना ही चाहिए।
- केवल आगमन न होने का साक्ष्य देने पर ही इस निष्कर्ष को समाप्त किया जा सकता है।
यह अवश्य सिद्ध करना चाहिए कि जब बच्चे का जन्म हो सका तब विवाहित पक्षों का आपस में कोई अभिगमन नहीं था।