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(i) धारा 73 के अधीन एक नया न्यासी नियुक्त किया जा सकता है -
(अ) न्यासों में व्यक्त एक व्यक्ति के द्वारा।
(ब) यदि ऐसा कोई न हो तो व्यवस्थापक द्वारा यदि वह जीवित है और
संविदा करने के लिए सक्षम है।
(ii) यदि, जो स्वीकार कर चुका है, उसके स्थान पर कोई न्यासी नियुक्त नहीं
किया जाता है तो संपत्ति व्यवस्थापक या उसके प्रतिनिधि, यदि वह मृत
है, को अवक्रमित हो जाती है।
- संपत्ति का क्या होता है? क्या वह न्यास से मुक्त हो जाती है? क्या वह न्यास के अधीन रहती है?
उत्तर है कि न्यास समाप्त नहीं होता है। व्यवस्थापक यदि वह जीवित नहीं है तो उसका प्रतिनिधि उसे न्यास में लाभग्राही के लिए धारित करता है। दूसरे शब्दों में व्यवस्थापक या उसका प्रतिनिधि उस न्यासी, जो अस्वीकार कर चुका है, के स्थान पर एक न्यासी हो जाता है।
नियम है कि न्यास न्यासी की कमी के कारण कभी विफल नहीं होगा। जहां कहीं भी न्यास विद्यमान है और उसे निष्पन्न करने के लिए कोई न्यासी नहीं है वह व्यक्ति जिसमें विधिक संपदा निर्विष्ट होती है, संपत्ति को एक न्यासी के रूप में धारित करता है। यह नियम लाभग्राही की रक्षा हेतु आशयित है।
मैलाट बनाम विल्सन (1903) 2 सी.एच. 494
II. लाभग्राही द्वारा अस्वीकरण (दावालागू) एवं स्वीकरण।
धारा 9
- लाभग्राही न्यास को स्वीकार करने को बाध्य नहीं है। वह उसे स्वीकार कर सकता
है या उसे अस्वीकार कर सकता है।
- उसका अस्वीकरण, न्यास के अधीन उसके हितों के परित्याग के समान होता
है।
- यदि वह अस्वीकार करने की इच्छा करता है तो ऐसा वह दो युक्तियों से कर
सकता है -
(i) न्यासी को प्रेषित अस्वीकरण पत्र द्वारा या
(ii) न्यास के अभिज्ञान के साथ न्यास के अतर्गत दावा स्थापित करके। 4. न्यास के असंगत दावा ऐसा दावा होगा जैसे न्यास संपत्ति का स्वामित्व।
जब लाभग्राही अस्वीकार करता है तो न्यास का क्या होता है?
(III) न्यास के अधीन न्यासी की संपदा। (पृष्ठ खाली छूटे हुए हैं)।
(IV) एक न्यास के अधीन लाभग्राही की संपदा (पृष्ठ खाली छूटे हुए हैं)