अभिव्यक्त न्यास का निर्वापन - Page 261

244 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

  1. आचरण द्वारा स्वीकरण के अन्य दृष्टांत हैः-

(i) मौन सम्मति द्वारा स्वीकरण - उसके नाम से न्यास संपत्ति के संबंध में लाए

गए वाद को अनुतम करना।

(ii) न्यास संपत्ति पर अधिपत्य निष्पादित करके स्वीकरण - किराएदार को नोटिस

देना।

(iii) संपत्ति से व्यवहार करके स्वीकरण - जब तक कि व्यवहार स्पष्टतया किसी

अन्य आधार के प्रति निर्देशय नहीं हैं।

(iv) न्यास के नोटिस के साथ लंबी चुप्पी के द्वारा (स्वीकरण) एवं चुप्पी के

संतोषजनक स्पष्टीकरण के अभाव में स्वीकरण।

(v) न्यास के एक भाग का स्वीकरण, समग्र का स्वीकरण है, भाग के किसी

प्रयासित अस्वीकरण के होते हुए भी।

  1. विधि में व्यक्त नहीं है कि कैसे न्यासी द्वारा जो पद को स्वीकार करने का इच्छुक

नहीं है, अस्वीकरण किया जाता है। वह केवल व्यक्त करती है कि अस्वीकरण

समुचित समय में अवश्य किया जाए।

  1. यद्यपि विधि इस विषय में शांत है, निम्नोक्त अस्वीकरण से संबंधित बिन्दु न्यायिक

निर्णयों द्वारा तय किए गए हैं।

(i) अस्वीकरण, स्वीकरण से पहले होना चाहिए। एक बार न्यासी ने पद स्वीकार

कर लिया है तो वह धारा 46 में वर्णित परिस्थितियों में केवल उसे अस्वीकार

कर सकता है।

(ii) एक व्यक्ति न्यास को अस्वीकार कर सकता है, यद्यपि वह, व्यवस्थापक के

जीवनकाल में न्यासी के रूप में कार्य करने के लिए स्वीकृति दे चुका है।

(iii) एक व्यक्ति न्यास के एक भाग के लिए पद को अस्वीकार और शेष के

लिए स्वीकार नहीं कर सकता।

(iv) अस्वीकरण शब्दों द्वारा या व्यवहार द्वारा हो सकता है।

  1. अस्वीकरण दावा त्याग का प्रभाव

(i) यदि मात्र एक ही न्यासी है तो अस्वीकरण न्यास संपत्ति को उसमें निर्विष्ट होने

को निरुद्ध करता है।

(ii) यदि दो (या) अधिक न्यासी हैं और उनमें से एक अस्वीकार करता है तो

ऐसा अस्वीकरण करता न्यास संपत्ति को दूसरे या अन्य में निर्विष्ट करता है

या उसे या उन्हें न्यास के सृजन के दिनांक से, अनन्य न्यासी या न्यासीगण

बनता है।

  1. जब मात्र एक न्यासी है और वह अस्वीकार करता है तो क्या होता है, दो बातें

हो सकती हैंः-