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भाग - III
न्यास का प्रशासन
न्यास के संबंध में न्यासी के निम्नलिखित होते हैंः-
(i) कर्त्तव्य - धाराएं 12-30
(ii) दायित्व - धाराएं 23-30
(iii) अधिकार - धाराएं 31-36
(iv) शक्तियां - धाराएं 37-45
(v) अयोग्यताएं - धाराएं 46-54
उसी प्रकार लाभग्राहियों के होते हैं -
(i) अधिकार - धाराएं 55-67
(ii) दायित्व - धारा 68
I. न्यासी के कर्त्तव्य
धाराएं 12-20
V (2) न्यास (न्यास विलेख में) लिखित निर्देशों का पालन करने के कर्त्तव्य। IV (3) लाभग्राहियों के बीच निष्पक्षतः कार्य करने का कर्त्तव्य। IV (4) क्षीण होती हुई और प्रत्यवर्ती संपत्ति को बेचने का कर्त्तव्य। IV (5) जावक फसलों के आदेय (अदायगी) और आय के संबंध में कर्त्तव्य। IV (6) उचित सावधानी बरतने का कर्त्तव्य।
IV (7) न्यास निधियों के निवेश के संबंध में कर्त्तव्य।
IV (8) सम्यक व्यक्तियों को न्यास धन अदा करने का कर्त्तव्य। IV (9) कर्त्तव्य एवं शक्तियों के प्रत्यायोजन के संबंध में कर्त्तव्य। IV (10) जब एक से अधिक न्यासी हों तो संयुक्ततः कार्य करने का कर्त्तव्य। IV (11) पर व्यक्ति का अधिकार स्थापित न करने का कर्त्तव्य। IV (12) अनुग्रहपूर्वक कार्य करने का कर्त्तव्य।
IV (13) न्यास संपत्ति में अवैध व्यापार न करने का कर्त्तव्य। IV (14) लेखे-जोखे के साथ तत्पर रहने का कर्त्तव्य।
* प्रत्येक पृष्ठ पर केवल शीर्षक हैं, विवरण नहीं।